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“केवल उपचार ही नहीं, बल्कि रोकथाम और निदान पर भी विशेष ध्यान देना आवश्यक” – मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

नागपुर, 14 फरवरी – पिछले एक दशक में कैंसर के मामलों में तेज़ी से वृद्धि हुई है। भारत जैसे देश ने स्वास्थ्य क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, फिर भी वर्तमान में कैंसर स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। यह समस्या केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी गंभीर रूप से महसूस की जा रही है। इसलिए केवल उपचार पर ही नहीं, बल्कि रोकथाम और निदान पर भी विशेष ध्यान देना आवश्यक है, ऐसा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा।

मुख्यमंत्री के हस्ते आज नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के ‘ऑन्कोलॉजी बियॉन्ड बॉर्डर्स’ इस वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर वे संबोधित कर रहे थे। एनसीआई के अध्यक्ष एडवोकेट सुनील मनोहर, महासचिव एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी शैलेश जोगलेकर, कोषाध्यक्ष आनंद औरंगाबादकर, चिकित्सा निदेशक डॉ. आनंद पाठक, ग्लोबल ऑपरेशंस एंड स्ट्रैटेजी डायरेक्टर शशी मंदापति तथा स्वास्थ्य क्षेत्र के अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि कोई भी बीमारी या विकार सीमाएं नहीं पहचानता और वह व्यक्ति की सामाजिक-आर्थिक स्थिति नहीं देखता। ऐसी परिस्थिति में सभी को मिलकर विचारों का आदान-प्रदान करना और सीमाओं से परे जाकर समाधान खोजना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन केवल चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक दृष्टिकोण से विचार करने का एक मंच है।

नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट जैसी संस्था की स्थापना से न केवल भारत बल्कि विभिन्न देशों के मरीजों को भी उपचार की सुविधा मिल रही है। देश को ऐसी और संस्थाओं की आवश्यकता है। इस संदर्भ में राज्य में ‘महा कैंसर फाउंडेशन’ की स्थापना की गई है, जिसके माध्यम से पूरे राज्य में ‘हब मॉडल’ के आधार पर कैंसर ग्रिड विकसित की जा रही है, जिससे राज्य के प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण कैंसर उपचार उपलब्ध हो सकेगा।

उन्होंने कहा कि कैंसर उपचार के क्षेत्र में अधिक शोध, नवाचार, मेडटेक, बायोटेक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का व्यापक उपयोग आवश्यक है। विशेष रूप से समय पर निदान और प्रारंभिक अवस्था में ही कैंसर पर प्रभावी नियंत्रण के लिए तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट और गयाना देश के स्वास्थ्य विभाग के बीच कैंसर उपचार पद्धति के संबंध में एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। साथ ही ‘द विंग्स’ नामक वैज्ञानिक पत्रिका के विशेषांक का विमोचन भी किया गया।

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