संवैधानिक मर्यादाओं का चीरहरण करने वाले विपक्ष की हैसियत हुई उजागर, इस कृत्य के लिए जनता से माफी मांगे – प्रेस रंजन पटेल
पटना, 12 मार्च 2026: लोकसभा अध्यक्ष के विरुद्ध लाया गया अविश्वास प्रस्ताव न केवल संवैधानिक रूप से धराशायी हुआ है, बल्कि विपक्ष के मानसिक दिवालियेपन को भी सार्वजनिक कर दिया। सदन के पटल पर मिली करारी शिकस्त ने यह सिद्ध कर दिया है कि संख्या बल विहीन विपक्ष केवल और केवल ‘नकारात्मक राजनीति’ का पर्याय बनकर रह गया है।
केवल सुर्खियां बटोरने के लिए और चर्चा में रहने के लिए लोकसभा अध्यक्ष जैसे निष्पक्ष पद को विवादों में घसीटना लोकतंत्र के इतिहास का एक काला अध्याय है। विपक्ष ने अपनी क्षुद्र राजनीति के लिए संसद की सर्वोच्चता तथा गरिमा को आघात पहुंचाया है। देश की जनता को गुमराह करने और एक झूठा केवल नैरेटिव गढ़ने की विपक्ष की कोशिश पूरी तरह बेनकाब हो गई है। यह प्रस्ताव किसी सिद्धांत के लिए नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक कुंठा मिटाने के लिए लाया गया था।
संसद के बहुमूल्य समय को नष्ट करना और देश की प्रगति में रोड़े अटकाना विपक्ष का एकमात्र एजेंडा बन चुका है। अपनी ‘हैसियत’ जानते हुए भी सदन को बंधक बनाना जनता के जनादेश का घोर अपमान है।जिस प्रकार विपक्ष ने देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम करने का कुत्सित प्रयास किया है, उसके लिए उन्हें सार्वजनिक रूप से देश की जनता के सामने घुटने टेककर माफी मांगनी चाहिए।
लोकसभा स्पीकर के खिलाफ लाये गये अविश्वास में विपक्षी पार्टिओं की हार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ये केवल सदन में हीं नहीं बल्कि जनता की अदालत में भी पूरी तरह खारिज हो चुका है। संख्या बल के अभाव में भी अहंकारी प्रदर्शन करना यह दर्शाता है कि विपक्ष का लोकतंत्र में विश्वास नहीं, बल्कि केवल सत्ता की ललक है।
“विपक्ष की यह शर्मनाक हार उनकी अप्रासंगिकता पर अंतिम मुहर है। अब समय आ गया है कि देश को गुमराह करने वाले ये दल अपनी हार स्वीकार करें और अपने पापों का प्रायश्चित कर जनता से माफी मांगें।