केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली के लाल किला मैदान में आयोजित जनजातीय समागम को संबोधित करते हुए कहा कि वनवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और अधिकारों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने मंच से बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC की कोई भी पाबंदी वनवासी समाज या वनवासी व्यक्ति पर लागू नहीं होगी।
UCC लागू करते समय जनजातीय समाज को इसके दायरे से बाहर रखा गया है : अमित शाह
अमित शाह ने कहा कि गुजरात और उत्तराखंड में UCC लागू करते समय जनजातीय समाज को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी परंपरा के साथ खिलवाड़ नहीं करेगी और वनवासी समाज के अधिकारों का अतिक्रमण नहीं होने दिया जाएगा।
गृह मंत्री ने कहा कि यह जनजातीय समागम आने वाले समय में याद किया जाएगा। उन्होंने गणेश राम भगत और सतेंद्र सिंह की सराहना करते हुए कहा कि जनजातीय समाज की पहचान, एकता और संस्कृति की रक्षा के लिए जो आंदोलन चलाया गया है, वह भगवान बिरसा मुंडा के उलगुलान के बाद देश को एकत्रित करने वाला बड़ा आंदोलन है।
अमित शाह ने कहा कि देश के सुदूर क्षेत्रों से पारंपरिक वेशभूषा, वाद्य यंत्रों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ आए जनजातीय समाज के लोगों को देखकर ऐसा लगता है जैसे भगवान बिरसा मुंडा स्वयं साक्षात उपस्थित हों। उन्होंने कहा कि यह वर्ष भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती का वर्ष है और यह पूरे देश के लिए गौरव का अवसर है।
उन्होंने सिद्धू-कान्हू, बाबा तिलका मांझी, वीरांगना रानी दुर्गावती, शहीद वीर नारायण सिंह, कोमा राम भील और नागालैंड की रानी मां जैसे जनजातीय नायकों को याद करते हुए कहा कि इन वीरों ने देश, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा के लिए संघर्ष किया।
अमित शाह ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों को चुनौती दी और पूरे देश को संदेश दिया कि हमारा धर्म ही असली धर्म है, जिस पर किसी का कब्जा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और पहाड़ जनजातीय समाज के लिए केवल संसाधन नहीं, बल्कि आस्था, अस्मिता और संस्कृति की रक्षा का मजबूत आधार हैं।
गृह मंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज ने दुनिया को सबसे बड़ा सस्टेनेबल मॉडल दिया है। बिना किसी लिखित नियम के इस समाज ने विविधता में एकता और एकता में विविधता के मंत्र को साकार किया है। उन्होंने कहा कि संविधान ने सभी नागरिकों को अपने मूल धर्म में सम्मान के साथ जीने का अधिकार दिया है और लोभ, लालच या जबरन धर्म परिवर्तन की अनुमति नहीं दी जा सकती।
अमित शाह ने कहा कि दिल्ली के लाल किला मैदान से जनजातीय समाज जो संदेश लेकर जाएगा, वह समाज को संस्कृति और देश से जोड़कर रखेगा। उन्होंने कहा कि जो लोग समाज में भेद पैदा करने की कोशिश करते हैं, उन्हें यह सम्मेलन स्पष्ट संदेश देता है कि भारत की सांस्कृतिक एकता हजारों वर्षों पुरानी है।

उन्होंने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान राम ने शबरी के जूठे बेर खाकर और निषादराज का सम्मान कर समाज को एकता का संदेश दिया था। यह परंपरा बताती है कि वनवासी समाज भारत की आत्मा का अभिन्न हिस्सा है।
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पांच दशक पुरानी नक्सल समस्या का पूर्ण खात्मा किया
गृह मंत्री ने नक्सल समस्या पर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पांच दशक पुरानी नक्सल समस्या का पूर्ण खात्मा किया गया है। उन्होंने दावा किया कि देश नक्सलवाद से पूरी तरह स्वतंत्र हो चुका है। उन्होंने कहा कि नक्सल हिंसा में 40 हजार से अधिक जनजातीय समाज के लोग मारे गए, लेकिन अब देश इस समस्या से मुक्त हो गया है।
अमित शाह ने कहा कि जहां पहले नक्सल विरोधी अभियान के लिए सुरक्षा बलों के कैंप लगाए जाते थे, उनमें से 70 कैंपों को शहीद वीर जनसुविधा केंद्रों में बदल दिया गया है। उन्होंने कहा कि अब जनजातीय क्षेत्रों में विकास का नया दौर शुरू हो रहा है।
उन्होंने भाजपा सरकार को जनजातीय समाज के कल्याण के लिए समर्पित बताते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार से पहले जनजातीय कल्याण मंत्रालय नहीं था। अटल सरकार ने इसकी शुरुआत की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे आगे बढ़ाया।

अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस के समय जनजातीय समाज का कुल बजट 28 हजार करोड़ रुपये था, जबकि मोदी सरकार ने इसे बढ़ाकर 1.5 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह बताता है कि केंद्र सरकार जनजातीय समाज के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
गृह मंत्री ने कहा कि देश में पहली बार गरीब परिवार से आने वाली जनजातीय समाज की बेटी द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि आज ओडिशा और छत्तीसगढ़ में जनजातीय समाज से मुख्यमंत्री हैं, जो जनजातीय नेतृत्व के बढ़ते सम्मान और भागीदारी का प्रमाण है।

