केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि देश खरीफ 2026 सीजन के लिए पूरी तरह तैयार है। दिल्ली के पूसा स्थित सुब्रमण्यम हॉल में आयोजित राष्ट्रीय खरीफ कृषि सम्मेलन के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि खरीफ सीजन के लिए देश में आवश्यकता से 11 प्रतिशत अधिक गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खरीफ सीजन में देशभर में लगभग 173 लाख क्विंटल बीजों की आवश्यकता है, जबकि 192 लाख क्विंटल बीज उपलब्ध कराए गए हैं। राज्यों की जरूरत के अनुसार बीजों का आवंटन भी पूरा कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि राज्यों को समय पर बीज उठाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि खरीफ बुवाई से पहले किसानों तक बीज पहुंच सकें।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मौसम की अनिश्चितताओं को ध्यान में रखते हुए 1.74 लाख क्विंटल का राष्ट्रीय बीज रिजर्व भी तैयार किया गया है। यदि किसी क्षेत्र में बारिश देर से होती है, सूखे की स्थिति बनती है या दोबारा बुवाई की जरूरत पड़ती है, तो किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराए जा सकेंगे।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ सरल और पारदर्शी तरीके से मिले, इसके लिए फार्मर आईडी अभियान को तेज किया गया है। अब तक 9.76 करोड़ से अधिक फार्मर आईडी तैयार हो चुकी हैं। इससे किसानों को बार-बार अलग-अलग दस्तावेज जमा करने की जरूरत कम होगी और उर्वरक, सहायता राशि तथा अन्य सुविधाओं का लाभ सही पात्र किसानों तक पहुंच सकेगा।
कृषि ऋण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि देश में कृषि ऋण का औसत आकार लगभग 1.32 लाख रुपये है, लेकिन राज्यों और क्षेत्रों के बीच इसमें काफी अंतर है। पूर्वी भारत में ऋण प्रवाह अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में कृषि ऋण प्रवाह कम है, वहां बैंकों के साथ बैठक कर किसानों को समय पर पर्याप्त ऋण उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने बटाईदार और किराये की जमीन पर खेती करने वाले किसानों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में किसान ऐसे हैं जिनके पास अपनी जमीन नहीं है, लेकिन वे खेती करते हैं। ऐसे किसानों को योजनाओं का लाभ कैसे मिले, इस पर राज्यों के साथ गंभीर चर्चा हुई है। सफल राज्य मॉडलों का अध्ययन कर राष्ट्रीय स्तर पर उपयुक्त व्यवस्था विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

फसल बीमा योजना पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि योजना का दायरा व्यापक है, लेकिन कुछ कमियों को दूर करना जरूरी है। क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट और रिमोट सेंसिंग आधारित आकलन को अधिक सटीक, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए टीम गठित की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्यों द्वारा प्रीमियम भुगतान और बीमा कंपनियों द्वारा क्लेम निपटान में देरी को गंभीरता से लिया गया है। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद मुआवजे में देरी होने पर 12 प्रतिशत ब्याज भुगतान का प्रावधान लागू होगा।
नकली और घटिया कीटनाशकों को बड़ी चिंता बताते हुए उन्होंने कहा कि राज्यों को सैंपलिंग बढ़ानी होगी, प्रयोगशालाओं को मजबूत करना होगा और NABL प्रमाणित लैब का विस्तार करना होगा। नकली कृषि इनपुट्स के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाने पर भी सहमति बनी है।
PM-AASHA योजना के तहत खरीद में देरी को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब तय समयसीमा के भीतर खरीद पूरी करने पर सहमति बनी है। इसके साथ ही कृषि विज्ञान केंद्रों को मजबूत करने, किसान उत्पादक संगठनों की गति बढ़ाने और फसल व क्षेत्र के अनुसार उपयुक्त किस्मों पर काम तेज करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि हर राज्य के लिए अलग कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा। इसमें मिट्टी, जलवायु, पोषक तत्वों की उपलब्धता, उपयुक्त फसलें, बीज किस्में और उर्वरक उपयोग जैसे कारकों को शामिल किया जाएगा, ताकि कृषि योजना अधिक वैज्ञानिक, व्यवहारिक और क्षेत्र विशेष की जरूरतों के अनुरूप हो सके।
प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग पर भी सम्मेलन में विस्तार से चर्चा हुई। शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि प्राकृतिक खेती के लिए 20 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया है और लगभग 8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र इससे जुड़ा है। उन्होंने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए एकीकृत खेती विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे आय बढ़ाने का टिकाऊ और व्यावहारिक रास्ता बन सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर 1 जून से 30 जून तक “खेत बचाओ अभियान” चलाएंगी। इसके तहत अधिकारी और कृषि टीमें गांव-गांव जाकर संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य कार्ड की सिफारिशों, प्राकृतिक खेती, बेहतर फसल प्रबंधन और सरकारी योजनाओं की जानकारी देंगी। जहां संभव होगा, वहां किसान क्रेडिट कार्ड, कृषि यंत्रीकरण उपकरण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और अन्य सुविधाओं की उपलब्धता में भी मदद की जाएगी।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल में कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व उत्पादन हुआ है। उन्होंने कहा कि नई सोच, नई तकनीक, बेहतर समन्वय और किसान-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ देश की कृषि आगे बढ़ रही है।
राष्ट्रीय खरीफ कृषि सम्मेलन का मुख्य संदेश यह रहा कि केंद्र और राज्य अब कृषि को केवल मौसमी गतिविधि नहीं, बल्कि वैज्ञानिक योजना, समयबद्ध क्रियान्वयन और किसान सशक्तिकरण पर आधारित राष्ट्रीय मिशन के रूप में देख रहे हैं। बीज से लेकर बीमा, ऋण से लेकर गुणवत्ता नियंत्रण और प्राकृतिक खेती से लेकर राज्यवार कृषि रोडमैप तक खरीफ 2026 के लिए व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

