लखनऊ, 13 जुलाई। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। सोमवार को 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (नेशनल एक्सप्रेसवे-6) को जनता के लिए समर्पित कर दिया गया। इसके शुरू होने के साथ ही लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा का समय ढाई से तीन घंटे से घटकर मात्र 35 से 45 मिनट रह गया है।

करीब 4,500 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस एक्सप्रेसवे की परिकल्पना वर्ष 2018 में की गई थी। इसका उद्देश्य दोनों प्रमुख शहरों के बीच बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करना, सुरक्षित और तेज यातायात उपलब्ध कराना तथा औद्योगिक एवं आर्थिक गतिविधियों को नई गति देना था।
2019 में रखी गई थी आधारशिला
मार्च 2019 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस परियोजना की आधारशिला रखी थी। दिसंबर 2020 में केंद्र सरकार ने इसे नेशनल एक्सप्रेसवे-6 (NE-6) का दर्जा दिया।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने परियोजना को दो पैकेजों में पूरा कराया। पहला पैकेज लखनऊ के अमौसी और शहीद पथ क्षेत्र में लगभग 18 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड सेक्शन था, जबकि दूसरा लगभग 45 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड सेक्शन है, जो लखनऊ और उन्नाव के कई गांवों से होकर गुजरता है।

बिना रुके कटेगा टोल
इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी विशेषताओं में मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम शामिल है। यहां पारंपरिक टोल प्लाजा नहीं बनाए गए हैं। वाहन बिना रुके गुजरेंगे और फास्टैग तथा ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक के जरिए टोल स्वतः कट जाएगा।
इस व्यवस्था से यात्रियों का समय बचेगा, ईंधन की खपत कम होगी और टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम से राहत मिलेगी।

AI आधारित स्मार्ट एक्सप्रेसवे
एक्सप्रेसवे को अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया गया है। पूरे मार्ग पर 80 से अधिक हाई-डेफिनिशन कैमरे, 16 वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम और स्पीड राडार लगाए गए हैं। निर्धारित गति सीमा से अधिक रफ्तार होने पर ऑटोमैटिक ई-चालान जारी किया जाएगा।
सड़क निर्माण में सैटेलाइट आधारित ऑटोमेटेड मशीन गाइडेंस सिस्टम का उपयोग किया गया है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता और सटीकता में सुधार हुआ है।

ग्रीन कॉरिडोर के रूप में विकसित
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एक्सप्रेसवे के दोनों ओर 46 हजार से अधिक पौधे लगाए गए हैं। इससे यह मार्ग एक ग्रीन कॉरिडोर के रूप में विकसित हुआ है।

औद्योगिक और आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे से सबसे अधिक लाभ नौकरीपेशा लोगों, छात्रों, व्यापारियों, उद्योगों और रोजाना यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को मिलेगा। यह परियोजना प्रस्तावित स्टेट कैपिटल रीजन, औद्योगिक निवेश, तेज माल परिवहन, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
प्रदेश सरकार का मानना है कि यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास, निवेश आकर्षण और आधुनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

