नव दीक्षार्थी बाल ब्रह्मचारी डॉ. उर्वशी दीदी बनी आर्यिका 105 श्री विख्यातमती माताजी

नागालेण्ड की राजधानी डीमापुर की पुण्य धरा पर ससंघ विराजित परम पूज्या 105 गरिमामती माताजी ने अपने कर कमलों से गुरूवार 01 जून 2023 को आयोजित दीक्षा दिवस समारोह में अपने‌ ही संघ की संघस्थ बा.ब्र. डॉ उर्वशी दीदी को सैंकड़ो की संख्या में उपस्थित स्थानीय समाज के अतिरिक्त बाहर से पधारे लगभग 1300 श्रावक और श्राविकाओं की साक्षी‌ में विधिवत आर्यिका दीक्षा प्रदान की एवं उनका 105 श्री विख्यातमती माताजी नाम रखा गया।

जैन धर्म में इच्छा का समापन, कषायों का शमन, आत्म विशुद्ध का आयाम, मानवता का चरमोत्कर्ष, सभी भौतिक सुख सुविधाएं त्याग कर एक सन्यासी का जीवन बीताने के लिए खुद को समर्पित कर भगवान बनने की प्रक्रिया का नाम है‌- जैनेश्वरी दीक्षा।

मालूम हो दिगम्बर जैन समाज की महान साध्वी, पूर्वोत्तर की लोकप्रिय गुरुमां 105 श्री सुपार्श्वमती माताजी से दीक्षित 105 श्री गरिमामती माताजी एवं 105 श्री गंभीरमती माताजी द्वय के कर कमलों से पूर्वांचल की ग्यारहवीं तथा पूरे भारतवर्ष में दी गई यह 13 वीं दीक्षा है।

पूज्या गरिमामती माताजी ने इसी दीक्षा प्रसंग पर सम्बोधित करते हुए कहा कि व्रत- नियम- संयम ही मानव जीवन का श्रंगार है। नियम और संयम के बिना मनुष्य अपने अहम लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता। उन्होनें कहा कि साधु जीवन में‌ ना कोई आकर्षण होता है और न ही आकांक्षा, ना भूख ना प्यास, मन की कामना रहित सादगी का जीवन जीना ही संन्यास है।

श्री दिगम्बर जैन पंचायत, गुवाहाटी पूज्या गरिमामती माताजी एवं गंभीरमती माताजी ससंघ को शत शत वंदन…शत शत नमन करते हुए आज आर्यिका के रूप में संघ में सम्मिलित 105 श्री विख्यात मती माताजी को बारंबार बंदामि करती है तथा आप शीघ्र ही अपने लक्ष्य को प्राप्त करें, आशा व्यक्त करती है।

साथ‌ ही इस विराट आयोजन की एतिहासिक सफलता एवं दी गई भव्य व्यवस्थित व्यवस्था के लिए श्री दिगम्बर जैन पंचायत, गुवाहाटी, डीमापुर की सकल दिगम्बर जैन समाज को धन्यवाद प्रेषित करती है।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *