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भगवान परशुराम का जीवन ज्ञान, साहस और मर्यादा का अद्भुत संगम है: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ताअंतरराज्यीय ब्राह्मण सम्मेलन में सीएम ने कहा, हर वर्ग को समान अधिकार दिलाना हमारा लक्ष्य

नई दिल्ली, 5 अक्टूबर 2025 | दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने कहा है कि भगवान परशुराम जी का जीवन ज्ञान, साहस और मर्यादा का अद्भुत संगम है। उनके आदर्श हमें यह सिखाते हैं कि धर्म का सार केवल आचरण में नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व भी है। मुख्यमंत्री ने यह विचार आज अंतरराज्यीय ब्राह्मण सम्मेलन में व्यक्त किए। यह कार्यक्रम पीतमपुरा स्थित वेस्ट एन्क्लेव में श्री मैथिली ब्राह्मण सभा, दिल्ली प्रदेश द्वारा आयोजित किया गया था। मुख्यमंत्री के अनुसार ब्राह्मण समाज ने सदैव ज्ञान, संस्कृति और धर्म के माध्यम से समाज को दिशा दी है। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य हर वर्ग के लोगों को समान अवसर और सभी समुदायों के योगदान को सम्मान के साथ स्वीकार करना है।

इस कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के समाज कल्याा मंत्री रविन्द्र इन्द्रराज सिंह, हरियाणा सरकार के मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा, विधायक श्रीमती पूनम भारद्वाज सहित अनेक गणमान्यजन, सामाजिक प्रतिनिधि और विभिन्न राज्यों से आए ब्राह्मण समाज के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित थे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समाज के प्रतिनिधियों को भगवान परशुराम जी के जीवन, आदर्शों और शिक्षाओं से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने समाज की एकजुटता को उसकी सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि संगठित समाज ही वास्तविक प्रगति कर सकता है। मुख्यमंत्री का यह भी कहना था कि ब्राह्मण समाज केवल शास्त्रों के उपासक नहीं बल्कि शस्त्र के भी रक्षक रहे हैं, जिन्होंने धर्म, शिक्षा और सद्भावना की लौ को जलाए रखा है।

मुख्यमंत्री ने दिल्ली के विकास की दिशा में सभी वर्गों से सहयोग की अपील की और कहा कि अब समय आ गया है कि दिल्ली अपने विकास की गति तेज करे और विकसित राजधानी के रूप में उदाहरण बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य है कि हर वर्ग के लोगों को समान अवसर मिले और सभी समुदायों के योगदान को सम्मान के साथ स्वीकार किया जाए। उन्होंने उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आप सबका सहयोग दिल्ली के सर्वांगीण विकास और हर वर्ग की प्रगति के लिए हमारी सबसे बड़ी प्रेरणा है। मुख्यमंत्री का यह भी कहना था कि ऐसे आयोजन न केवल सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और समरसता के भाव को भी मजबूत करते हैं।

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