जबलपुर: मां नर्मदा के पवित्र तट गौरीघाट को स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे ‘भिक्षुक मुक्त अभियान’ के तहत बड़ी कार्रवाई की गई। अभियान के दौरान 12 भिक्षुकों को काउंसिलिंग के बाद उनके गृह निवास भेजा गया, जबकि निराश्रित बुजुर्गों और दिव्यांगों को आश्रय स्थलों और वृद्धाश्रम में स्थानांतरित किया गया। इस पहल से घाट पर आने वाले श्रद्धालुओं को भी काफी राहत मिली है।
नगर निगम और समाज कल्याण विभाग की संयुक्त कार्रवाई
नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के निर्देशानुसार नगर निगम और समाज कल्याण विभाग की संयुक्त टीम ने गौरीघाट क्षेत्र में अभियान चलाया।
अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल घाटों से भिक्षावृत्ति समाप्त करना ही नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों को पुनर्वास और बेहतर जीवन की दिशा में मदद करना है।
उपायुक्त अंकिता जैन ने बताया कि कई भिक्षुक अन्य शहरों से आकर गौरीघाट क्षेत्र में रह रहे थे। काउंसिलिंग और समझाइश के बाद इनमें से कई लोगों ने स्वयं अपने घर वापस जाने की इच्छा जताई, जिसके बाद उन्हें सुरक्षित उनके गृह स्थान भेजने की व्यवस्था की गई।
बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए मानवीय पहल
अभियान के दौरान मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए निराश्रित बुजुर्गों और दिव्यांगों के पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया गया।
- 75 वर्षीय एक वृद्ध महिला, जो बोलने में असमर्थ थीं, उन्हें सुरक्षित वृद्धाश्रम पहुंचाया गया।
- दो अन्य वृद्ध एवं विकलांग महिलाओं को भी जल्द ही वृद्धाश्रम भेजने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
नगर निगम का कहना है कि इन लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा, भोजन और देखभाल उपलब्ध कराई जाएगी ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।
इन भिक्षुकों को भेजा गया उनके घर
काउंसिलिंग के बाद घर लौटने की इच्छा जताने वाले भिक्षुकों में मुख्य रूप से शामिल हैं:
- गिरानी लाल कोल
- शालनी रागनी वंशकार
- विष्णु चौबे
- दयाशंकर वर्मा
- बाबूलाल भील
- नाथूलाल प्रजापति
- रमा चौधरी
- अन्य भिक्षुक
नगर निगम की टीम ने इन सभी को सुरक्षित उनके गृह स्थान तक भेजने की व्यवस्था की।
आश्रय स्थलों में कराया गया पुनर्वास
जिन लोगों का कोई सहारा नहीं था या जिन्हें तत्काल सहायता की आवश्यकता थी, उन्हें आश्रय स्थलों में भेजा गया।
- अनीता सोनी और गुलाब नारायण गुप्ता को शेल्टर होम भेजा गया
- आशा बाई को वृद्धाश्रम में स्थानांतरित किया गया
नगर निगम का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य केवल घाटों से भीड़ कम करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।

