नई दिल्ली, 22मई 2026 : प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना यानी PMFME योजना ने देश के माइक्रो फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री देवेश देवल ने पंचशील भवन, नई दिल्ली में मीडिया संवाद के दौरान योजना की उपलब्धियों और प्रभावों की जानकारी दी।
मंत्रालय के अनुसार, PMFME योजना के तहत अब तक 1,96,270 व्यक्तिगत माइक्रो फूड प्रोसेसिंग उद्यमों को क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी घटक के तहत सहायता दी गई है। खास बात यह है कि इनमें 40 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी महिला उद्यमी हैं। इसके अलावा 4 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों के लिए सीड कैपिटल सहायता स्वीकृत की गई है।
PMFME योजना को वर्ष 2020 में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य देश के असंगठित माइक्रो फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को औपचारिक बनाना, उद्यमों को वित्तीय सहायता देना, तकनीक, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, गुणवत्ता मानकों और बाजार से जोड़ना है। देश में करीब 25 लाख असंगठित खाद्य प्रसंस्करण उद्यम हैं, जिन्हें संगठित रूप से आगे बढ़ाने के लिए यह योजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस योजना का कुल परिव्यय 10,000 करोड़ रुपये है। इसे 2020-21 से 2024-25 तक लागू करने की मंजूरी दी गई थी, जिसे अब सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया गया है।
योजना के तहत वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) दृष्टिकोण को भी लागू किया जा रहा है। इसके तहत 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 726 जिलों में 137 विशिष्ट उत्पादों की पहचान की गई है। इससे स्थानीय और पारंपरिक उत्पादों को बाजार पहचान, ब्रांडिंग और बेहतर विपणन का अवसर मिल रहा है।
PMFME योजना के प्रमुख घटकों में व्यक्तिगत उद्यमों को 35 प्रतिशत क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी, अधिकतम 10 लाख रुपये तक सहायता, FPO, FPC, SHG और सहकारी संस्थाओं को कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अधिकतम 3 करोड़ रुपये तक सहायता, SHG सदस्यों को 40,000 रुपये प्रति सदस्य सीड कैपिटल, प्रशिक्षण, इनक्यूबेशन सेंटर, ब्रांडिंग और मार्केटिंग सपोर्ट शामिल हैं।
मंत्रालय ने बताया कि योजना के तहत अब तक 80 इनक्यूबेशन सेंटर स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 31 सेंटर चालू हो चुके हैं। ये सेंटर प्रोसेसिंग, ट्रेनिंग, टेस्टिंग और उद्यमिता विकास के स्थानीय केंद्र के रूप में काम करेंगे।
ब्रांडिंग और मार्केटिंग सहायता के तहत 32 प्रस्ताव और 40 ODOP ब्रांड स्वीकृत किए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप मिलेट आधारित उत्पादों, GI टैग उत्पादों, अचार, मखाना, मसाले, डेयरी और बेकरी उत्पादों सहित 200 से अधिक खाद्य उत्पाद लॉन्च किए गए हैं। इस सहायता से 1,164 माइक्रो उद्यमों को सीधा लाभ मिला है।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि PMFME समर्थित उद्यमों को GeM पोर्टल से जोड़ने और बाजार सहायता उपलब्ध कराने के लिए गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस के साथ समझौता किया गया है। इससे छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को सरकारी और संगठित बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।संयुक्त सचिव देवेश देवल ने कहा कि PMFME योजना माइक्रो फूड प्रोसेसिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरी है। इस योजना से वित्तीय सहायता, औपचारिकरण, प्रशिक्षण, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और आधुनिक बाजार संपर्क उपलब्ध हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह योजना महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमों को सशक्त बना रही है।

मंत्रालय के अनुसार, योजना से खाद्य प्रसंस्करण वैल्यू चेन में करीब 5,88,810 व्यक्तियों के लिए रोजगार और आजीविका के अवसर मजबूत हुए हैं। साथ ही फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने में भी योजना की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
PMFME लाभार्थियों ने वर्ल्ड फूड इंडिया, आहार और SIAL इंडिया जैसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भी भाग लिया है। वर्ल्ड फूड इंडिया 2025 के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा 26,000 लाभार्थियों को 778 करोड़ रुपये की क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी जारी की गई। इस आयोजन में 100 से अधिक PMFME लाभार्थी स्टॉल शामिल हुए और करीब 250 उत्पादों को डिजिटल डिस्प्ले के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।
मंत्रालय ने कहा कि PMFME योजना देशभर में माइक्रो फूड प्रोसेसिंग उद्यमों के औपचारिकीकरण, खाद्य सुरक्षा मानकों को अपनाने, पैकेजिंग सुधार, महिला नेतृत्व वाले उद्यमों और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने में लगातार प्रभावी भूमिका निभा रही है।

