नई दिल्ली, 22मई 2026 : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने दोनों मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर सुधार, शिकायत निवारण और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय “रिफॉर्म एक्सप्रेस” पर सवार हैं और सरकार का काम फाइलों में नहीं, बल्कि जनता के जीवन में दिखना चाहिए।

श्री चौहान ने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि किसान, गरीब, ग्रामीण और आम नागरिक को योजनाओं का लाभ पाने या शिकायतों के समाधान के लिए भटकना नहीं पड़े। इसके लिए योजनाबद्ध, समयबद्ध और परिणाममुखी व्यवस्था तैयार की जाए। उन्होंने कृषि, ग्रामीण विकास, भूमि संसाधन और ICAR से जुड़ी इकाइयों में शिकायत निवारण प्रणाली को अधिक मजबूत, प्रभावी और जवाबदेह बनाने के निर्देश दिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शिकायतों का समाधान केवल कागजों पर “डिस्पोजल” दिखाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाए कि लाभार्थी को वास्तविक राहत मिली या नहीं और योजना का लाभ जमीन पर पहुंचा या नहीं। उन्होंने निर्देश दिया कि हर महीने शिकायत निवारण व्यवस्था की समीक्षा होगी और जून में खरीफ कार्यों की व्यस्तता को देखते हुए दूसरे सोमवार को विस्तृत समीक्षा की जाएगी।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हर विभाग, हर योजना और हर डिवीजन यह पहचाने कि आम नागरिक को कठिनाई कहां आ रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़क योजना, कृषि योजनाओं, बागवानी, बीमा और विपणन जैसे क्षेत्रों में जहां भी लाभार्थी को अनावश्यक चक्कर लगाने पड़ते हैं, वहां नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर जटिल प्रक्रियाओं, बाधा पैदा करने वाले प्रावधानों और सुधार योग्य बिंदुओं की पहचान की जाए। उन्होंने कहा कि पुराने और अप्रासंगिक रेगुलेशंस को खत्म करना जरूरी है। हर काम के लिए लाइसेंस की आवश्यकता क्यों हो, कई जगह पंजीकरण या सरल व्यवस्था से भी काम हो सकता है।
बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा और डिजिटल गवर्नेंस के उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया। श्री चौहान ने कहा कि कृषि, ग्रामीण विकास, भूमि संसाधन और ICAR में डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा आधारित निर्णय, मॉनिटरिंग और विभागों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाए। इसके लिए अलग टीम बनाकर अध्ययन करने और उपयोगी प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
केंद्रीय मंत्री ने प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में बदलाव की भी बात कही। उन्होंने कहा कि फाइल निर्माण, नोटिंग, निर्णय-तैयारी और ड्राफ्टिंग की गुणवत्ता सुधारना जरूरी है। इसके लिए अधिकारियों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण की व्यवस्था की जाए, ताकि फाइलें अनावश्यक रूप से न अटकें और निर्णय अधिक स्पष्ट व परिणाममूलक हों।
कोर्ट केसों को लेकर भी श्री चौहान ने चिंता जताई। उन्होंने सभी विभागों से लंबित मामलों की सूची तैयार करने, नोडल अधिकारी तय करने और मजबूत कानूनी तैयारी सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि सरकारी पक्ष अदालतों में समय पर और प्रभावी ढंग से रखा जाना चाहिए, क्योंकि सरकार की हार का सीधा असर जनहित पर पड़ता है।
श्री चौहान ने कहा कि सुधारों को जनता तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है। योजनाओं और बदलावों की जानकारी किसान संगठनों, मजदूरों, सरपंचों, जनप्रतिनिधियों, सोशल मीडिया, ग्राफिक्स, वीडियो और रील्स के माध्यम से लोगों तक पहुंचाई जाए। उन्होंने कहा कि “रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म और इन्फॉर्म” के मंत्र पर काम करना होगा।
बैठक में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप विभागीय विजन दस्तावेज तैयार करने पर भी जोर दिया गया। श्री चौहान ने कहा कि हर विभाग वार्षिक, छह-माही, तिमाही, साप्ताहिक और दैनिक कार्ययोजना तैयार करे, ताकि काम की निगरानी मजबूत हो और परिणाम स्पष्ट रूप से सामने आएं।
उन्होंने राज्यों के साथ साझेदारी को कृषि और ग्रामीण विकास की सफलता की कुंजी बताया। श्री चौहान ने कहा कि वास्तविक काम राज्यों में होता है, इसलिए रोडमैप आधारित साझेदारी, जोनल कॉन्फ्रेंस और योजनावार समन्वय को मजबूत किया जाए। उन्होंने कृषि, पशुपालन, मत्स्य, फूड प्रोसेसिंग और संबद्ध क्षेत्रों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता भी बताई।
केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि शिकायत निवारण, रिफॉर्म, टेक्नोलॉजी, कोर्ट केस, राज्यों से समन्वय, जनसंवाद, 2047 रोडमैप और उपलब्धियों के प्रस्तुतीकरण तक हर मोर्चे पर सक्रिय, समयबद्ध और जवाबदेह कार्यशैली अपनानी होगी, ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुशासन विजन के अनुरूप योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंच सके।

