नई दिल्ली, 30 अक्टूबर 2026। संगठित साइबर अपराध के नेटवर्क पर शिकंजा कसते हुए दिल्ली पुलिस ने ‘ऑपरेशन साइहॉक 6.0’ के तहत बड़ी कार्रवाई की है। 28 और 29 अक्टूबर को चलाए गए इस विशेष अभियान में पुलिस ने 944 लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि 788 अन्य लोगों को पाबंद किया गया। इसके अलावा 2,081 लोगों को नोटिस जारी किए गए। दिल्ली पुलिस के अनुसार, अभियान के दौरान कुल 1,032 FIR पर कार्रवाई की गई और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) की 4,002 शिकायतों को जांच से जोड़कर कार्रवाई की गई। इन शिकायतों में लगभग 479.14 करोड़ रुपये की ठगी की रकम शामिल है।
दिल्ली पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, अभियान के दौरान 4,979 संदिग्धों को सत्यापन के लिए हिरासत में लिया गया या पूछताछ के लिए रोका गया। इस कार्रवाई में दिल्ली के सभी 15 जिलों के साथ क्राइम ब्रांच (साइबर) और इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट ने हिस्सा लिया।
पुलिस का कहना है कि इस बार अभियान का फोकस केवल साइबर ठगी करने वाले कॉलर या व्यक्तिगत अपराधियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन संगठित नेटवर्क और सुविधाएं उपलब्ध कराने वालों पर भी कार्रवाई की गई, जिनके माध्यम से साइबर अपराध को अंजाम दिया जाता है। इनमें फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले, संदिग्ध बैंकिंग गतिविधियों में मदद करने वाले कर्मचारी, फर्जी सिम कार्ड मुहैया कराने वाले, अवैध कॉल सेंटर संचालक और ठगी की रकम को नकदी या क्रिप्टोकरेंसी में बदलने वाले नेटवर्क शामिल हैं।
944 गिरफ्तार, 1,032 FIR पर कार्रवाई
दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, ऑपरेशन साइहॉक 6.0 के दौरान 944 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 788 लोगों को पाबंद किया गया। इसके अतिरिक्त 2,081 लोगों को नोटिस जारी किए गए। इस प्रकार कुल 3,813 लोगों के खिलाफ अलग-अलग कानूनी कार्रवाई की गई।
अभियान में कुल 1,032 FIR पर कार्रवाई हुई। इनमें 596 नई FIR दर्ज की गईं, जबकि 432 पहले से दर्ज मामलों में कार्रवाई की गई। इसके अलावा चार कलंदरों (Kalandras) की कार्रवाई भी की गई।
पुलिस ने बताया कि अभियान के दौरान NCRP की कुल 4,002 शिकायतों को संबंधित संदिग्ध खातों और आरोपियों से जोड़कर जांच में शामिल किया गया। इनमें 727 शिकायतें दिल्ली से और 3,275 शिकायतें दूसरे राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से संबंधित थीं। इन शिकायतों में लगभग 479.14 करोड़ रुपये की ठगी की रकम शामिल है। यह शिकायतों में दर्ज ठगी की कुल रकम है, इसे पुलिस द्वारा बरामद राशि नहीं समझा जाना चाहिए।
17 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में पहुंचीं 283 टीमें
साइबर अपराधी अक्सर एक राज्य में बैठकर दूसरे राज्य के नागरिकों को निशाना बनाते हैं। ऐसे नेटवर्क तक पहुंचने के लिए दिल्ली पुलिस की 283 टीमों ने कम से कम 17 राज्यों और 5 केंद्रशासित प्रदेशों में छापेमारी, तकनीकी निगरानी और स्थानीय पुलिस की मदद से कार्रवाई की।
पुलिस टीमों ने दक्षिण भारत में केरलम, तमिलनाडु और कर्नाटक से लेकर उत्तर भारत में जम्मू, हिमाचल प्रदेश और पंजाब तक तथा गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा सहित विभिन्न राज्यों में कार्रवाई की।
इस दौरान कई महत्वपूर्ण नेटवर्क पुलिस के निशाने पर आए। इनमें धनबाद में पकड़ा गया जामताड़ा से जुड़ा क्रेडिट कार्ड सिंडिकेट, दुर्ग-भिलाई का मैट्रिमोनियल फ्रॉड गिरोह, कानपुर और ग्रेटर नोएडा में म्यूल बैंक खातों की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क तथा मुंबई, लखनऊ, राजस्थान और पंजाब में सक्रिय खाता उपलब्ध कराने वाले मददगार शामिल हैं।
साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई
दिल्ली पुलिस के अनुसार, विभिन्न जिलों और विशेष इकाइयों ने व्यक्तिगत शिकायतों की जांच के साथ-साथ संदिग्ध बैंक खातों से जुड़े वित्तीय लेनदेन का भी पीछा किया। इससे ऐसे अंतरराज्यीय नेटवर्क सामने आए, जिनमें कथित तौर पर फर्जी कंपनियों के नाम पर चालू बैंक खाते खोले जाते थे और फिर उन्हें कमीशन लेकर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराया जाता था।
दक्षिण-पश्चिम और उत्तरी जिलों ने कई स्तरों पर बैंक खातों में धन के लेनदेन की जांच की। आउटर-नॉर्थ, आउटर और द्वारका जिलों ने स्थानीय म्यूल अकाउंट नेटवर्क पर कार्रवाई की। नॉर्थ-वेस्ट जिले ने कथित रूप से म्यूल खाते खुलवाने में मदद करने वाले बैंक अधिकारियों को गिरफ्तार किया। दक्षिण जिले ने ग्राहक डेटा का दुरुपयोग करने वाले सर्विस एजेंसी से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की।
आउटर-नॉर्थ जिले ने दूसरे लोगों की पहचान पर धोखाधड़ी से सिम कार्ड हासिल करने वाले नेटवर्क का भी पर्दाफाश किया।
फर्जी KYC कॉल, निवेश और मैट्रिमोनियल फ्रॉड पर शिकंजा
ऑपरेशन के दौरान साइबर ठगी के अलग-अलग तरीकों से जुड़े गिरोहों पर कार्रवाई की गई। इनमें फर्जी मोबाइल ऐप और फिशिंग संदेशों के जरिए ठगी, नकली KYC कॉल, अधिकारियों और कॉरपोरेट प्रतिनिधियों के नाम पर पहचान बदलकर धोखाधड़ी तथा ऑनलाइन खरीदारी, निवेश और शादी के नाम पर होने वाली ठगी शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम जिले ने फर्जी मोबाइल ऐप और फिशिंग संदेशों से जुड़े मामलों में कार्रवाई की। शाहदरा जिले ने नकली KYC कॉल के मामलों पर कार्रवाई की, जबकि सेंट्रल, शाहदरा और दक्षिण-पूर्व जिलों ने कॉरपोरेट अधिकारियों, सरकारी अधिकारियों और भुगतान कंपनियों के कर्मचारियों का रूप धारण कर ठगी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की।
इसके अलावा उत्तर, सेंट्रल, उत्तर-पूर्व और रोहिणी जिलों ने ऑनलाइन शॉपिंग, निवेश और मैट्रिमोनियल फ्रॉड से जुड़े मामलों में कार्रवाई की। आउटर जिले ने लोन ऐप के जरिए कथित सेक्सटॉर्शन के मामलों पर कार्रवाई की।
दक्षिण जिले ने चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) से संबंधित साइबर टिपलाइन इनपुट पर भी कार्रवाई की। पुलिस ने बताया कि विभिन्न मामलों में नकदी, सोना, वाहन और फ्रीज की गई क्रिप्टोकरेंसी के रूप में अपराध से प्राप्त संपत्ति का पता लगाया गया।
अवैध कॉल सेंटर और SIM बॉक्स भी पुलिस के निशाने पर
दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराध के लिए इस्तेमाल होने वाले बुनियादी ढांचे पर भी कार्रवाई की। द्वारका, दक्षिण-पश्चिम और पूर्वी जिलों ने ऐसे अवैध कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ किया, जिन पर देशभर के नागरिकों और कारोबारियों को फर्जी पहचान, नकली कारोबार और जबरन वसूली के जरिए निशाना बनाने का आरोप है।
पूर्वी जिले ने एक ऐसे कथित अवैध कॉल सेंटर का पता लगाया, जो पुलिस से बचने के लिए चलते वाहन से संचालित किया जा रहा था।
IFSO यूनिट ने बड़ी संख्या में फर्जी कॉल करने में इस्तेमाल होने वाले SIM बॉक्स जब्त किए। यूनिट ने कथित फर्जी निवेश लिंक और ऐसे टेलीग्राम चैनलों पर भी कार्रवाई की, जिनके माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी, eSIM और बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम किया जा रहा था।
पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य साइबर अपराध की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करना है, जिसमें बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले, बैंकिंग प्रक्रिया में मदद करने वाले अंदरूनी लोग, सिम कार्ड विक्रेता, कॉल सेंटर संचालक और ठगी की रकम को ठिकाने लगाने वाले नेटवर्क शामिल हैं।
1,037 मोबाइल फोन और 1,301 सिम कार्ड जब्त
अभियान के दौरान दिल्ली पुलिस ने बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बैंकिंग दस्तावेज और अन्य सामान जब्त किए। पुलिस की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार जब्ती में शामिल हैं:
- 1,037 मोबाइल फोन
- 1,301 सिम कार्ड
- 106 लैपटॉप और कंप्यूटर
- 397 ATM कार्ड
- 244 से अधिक बैंक किट और पासबुक
- 325 आधार कार्ड
- 6 SIM बॉक्स
- 11 कारें और 10 दोपहिया वाहन
- 37.67 लाख रुपये नकद
- सोना और USDT क्रिप्टोकरेंसी
पुलिस ने बताया कि अपराध से प्राप्त धन को ATM और चेक के जरिए निकालने, सोना खरीदने तथा USDT जैसी क्रिप्टोकरेंसी में बदलने के तरीकों की भी जांच की जा रही है।
डेटा एनालिटिक्स के आधार पर तय किए गए निशाने
दिल्ली पुलिस के अनुसार, ऑपरेशन साइहॉक 6.0 में कार्रवाई के लिए केवल सामान्य सत्यापन पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न डिजिटल और जांच संबंधी डाटाबेस का विश्लेषण किया गया।
इसमें केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के इनपुट और NCRP पर दर्ज शिकायतों के रुझानों का इस्तेमाल किया गया। समन्वय पोर्टल (Samanvaya) की मदद से दिल्ली में संदिग्ध म्यूल खातों और लोगों को देश के दूसरे हिस्सों में दर्ज शिकायतों से जोड़ा गया।
प्रतिबिंब (Pratibimb) पोर्टल के जरिए साइबर अपराध में इस्तेमाल मोबाइल नंबरों की लोकेशन मैपिंग की गई। इसके अलावा संदिग्ध बैंक खातों, बैंक शाखाओं, कॉल करने वालों, SIM बॉक्स और PoS एजेंटों से संबंधित हॉटस्पॉट डेटा का इस्तेमाल कर जिलावार कार्रवाई की योजना बनाई गई।
IFSO की ओर से विकसित इन-हाउस सॉफ्टवेयर के जरिए कई शिकायतों में बार-बार सामने आने वाले बैंक खातों और IFSC कोड की पहचान की गई। पुलिस के अनुसार, इस सॉफ्टवेयर को जल्द ही साइबर पुलिस स्टेशनों और जिलों के साथ साझा किया जाएगा।
IFSO ने बैंकों, पेमेंट गेटवे, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं और आईटी मध्यस्थों के साथ समन्वय बैठक भी की, जिसमें 70 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में डिजिटल अरेस्ट और NBFC से संबंधित धोखाधड़ी के मामलों में सूचनाओं के तेजी से आदान-प्रदान पर चर्चा की गई।
साइहॉक के छह संस्करणों में 3,300 से अधिक गिरफ्तारियां
दिल्ली पुलिस के अनुसार, ऑपरेशन साइहॉक का यह छठा संस्करण था। इससे पहले पांचवां संस्करण 16 और 17 जून 2026 को चलाया गया था। पुलिस ने बताया कि साइहॉक 5.0 की तुलना में इस बार नई FIR में लगभग 24 प्रतिशत, NCRP शिकायतों पर कार्रवाई में लगभग 46 प्रतिशत और दिल्ली से बाहर के राज्यों की शिकायतों पर कार्रवाई में लगभग 57 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
पुलिस के मुताबिक, छह संस्करणों को मिलाकर अब तक इस अभियान के तहत 3,300 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। दिल्ली पुलिस ने कहा कि साइहॉक को आगे भी नियमित और खुफिया सूचनाओं पर आधारित अभियान के रूप में जारी रखा जाएगा। दर्ज मामलों की जांच के जरिए ठगी की रकम के पूरे लेनदेन का पता लगाने, विदेश में बैठे कथित संचालकों की पहचान करने और अपराध से अर्जित संपत्ति जब्त करने के प्रयास जारी रहेंगे।
दिल्ली पुलिस की नागरिकों को साइबर सुरक्षा सलाह
दिल्ली पुलिस ने नागरिकों को आगाह किया है कि वे कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता, ATM कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड या बैंक किट किसी अन्य व्यक्ति को न दें। साइबर ठगी की रकम को अपने खाते से निकालने या आगे भेजने की अनुमति देने पर खाताधारक भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।
पुलिस ने यह भी सलाह दी है कि KYC, QR कोड या साउंड बॉक्स ठीक करने के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति को अपना मोबाइल फोन न सौंपें। किसी भी व्यक्ति के साथ OTP, PIN या कार्ड संबंधी जानकारी साझा न करें।
सोशल मीडिया पर छोटे काम के बदले इनाम देने वाले ऐप, ऑनलाइन शॉपिंग और निवेश के आकर्षक ऑफर तथा बार-बार अग्रिम भुगतान मांगने वाले प्रस्तावों से सतर्क रहने की अपील की गई है।
साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस के अनुसार, समय पर शिकायत करने से ठगी की रकम को फ्रीज कराने की संभावना बढ़ सकती है।


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