ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘जन महाभियोग’ प्रस्ताव पारित, राहुल गांधी बोले—CEC पर देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए

नई दिल्ली, 31 अक्टूबर 2026। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने शनिवार को ‘जन महाभियोग’ कार्यक्रम आयोजित कर उनके पद से हटाने और उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग वाला प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर आयोजित इस प्रतीकात्मक कार्यक्रम में विपक्षी दलों के सांसदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्र नेताओं और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रस्ताव पेश किया, जबकि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने समापन वक्तव्य दिया। कार्यक्रम में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, राजद नेता तेजस्वी यादव, समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव सहित विभिन्न विपक्षी दलों के नेता मौजूद रहे।

विपक्ष की ओर से पारित प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त पर चुनावी प्रक्रिया में कथित हेरफेर, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के जरिए मतदाता सूची से नाम हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया में अन्य चुनाव आयुक्तों को दरकिनार करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। प्रस्ताव में CEC को पद से हटाने, SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने, संबंधित कानून में संशोधन करने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी शामिल रही।

खरगे बोले—मताधिकार खतरे में, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के निर्देश पर चल रहा चुनाव आयोग

प्रस्ताव पेश करते हुए राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि भारतीय संविधान ने नागरिकों को जो मताधिकार दिया है, वह आज गंभीर खतरे में है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों पर चुनाव आयोग चलाने का आरोप लगाया।

खरगे ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की भूमिका मतदाता सूची और चुनावी परिणामों को प्रभावित करने वाली गतिविधियों में रही है। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत लगभग 13 करोड़ 20 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने, फॉर्म-6 में कथित गैरकानूनी बदलाव और ECINET सॉफ्टवेयर के जरिए मतदाता सूची पर नियंत्रण केंद्रीकृत करने का मुद्दा उठाया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया में अन्य दो चुनाव आयुक्तों को पर्याप्त भूमिका नहीं दी जा रही है और संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता प्रभावित हो रही है।

193 सांसदों के नोटिस खारिज किए जाने का मुद्दा उठाया

खरगे ने दावा किया कि लगभग सात महीने पहले विपक्ष के 193 सांसदों ने संसद के दोनों सदनों में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव का नोटिस दिया था, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से सत्ता में बने रहने के लिए राजनीतिक दलों को तोड़ने और केंद्रीय जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग जैसे तरीके अपनाए गए। अब विपक्ष का आरोप है कि SIR के माध्यम से मतदाता सूची में बदलाव कर विपक्ष समर्थक माने जाने वाले मतदाताओं के नाम हटाने और चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।

खरगे ने दिसंबर 2023 में पारित मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों से संबंधित कानून का भी विरोध किया। उनके अनुसार, इस कानून के जरिए चुनाव आयुक्तों को आधिकारिक कार्यों के लिए कानूनी कार्रवाई से व्यापक सुरक्षा दी गई है। उन्होंने इस कानूनी प्रावधान को समाप्त या संशोधित करने की मांग की।

महाराष्ट्र, हरियाणा और कर्नाटक में चुनावी गड़बड़ी के आरोप

कांग्रेस अध्यक्ष ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष के बेहतर प्रदर्शन के कुछ महीनों बाद हुए विधानसभा चुनाव में लगभग 40 लाख नए मतदाताओं के नाम जोड़कर गड़बड़ी की गई।

उन्होंने हरियाणा में भी चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। कर्नाटक के आलंद विधानसभा क्षेत्र का मुद्दा उठाते हुए खरगे ने कहा कि वोटर सूची में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही राज्य की CID ने चुनाव आयोग से 18 बार जानकारी मांगी, लेकिन उसे जवाब नहीं मिला।

खरगे ने आरोप लगाया कि वोट चोरी के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले विपक्षी नेताओं और युवाओं को हिरासत में लिया गया। उन्होंने SIR की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग भी की।

राहुल गांधी बोले—हर सातवां वोटर हटाने का दावा 2024 के चुनाव पर सवाल खड़ा करता है

कार्यक्रम के समापन वक्ता राहुल गांधी ने SIR के तहत मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि लगभग 13 करोड़ 20 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जो देश के हर सातवें मतदाता और कुल मतदाताओं के करीब 15 प्रतिशत के बराबर है।

राहुल गांधी ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच जीत-हार का अंतर लगभग तीन प्रतिशत वोटों का था। ऐसे में यदि अब चुनाव आयोग यह कह रहा है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं को वोट देने का अधिकार नहीं था, तो 2024 के चुनाव की वैधता पर भी सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने तर्क दिया कि चुनाव आयोग एक ओर 13 करोड़ 20 लाख मतदाताओं के नाम हटाने की बात कह रहा है और दूसरी ओर 2024 के चुनाव के बाद बनी सरकार को वैध मान रहा है। राहुल गांधी ने इसे विरोधाभासी बताते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

हालांकि, मतदाता सूची से नाम हटाने और SIR के आंकड़ों को लेकर चुनाव आयोग का अपना पक्ष भी है। आयोग ने पूर्व में स्पष्ट किया है कि SIR के दौरान 13.39 करोड़ मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत, डुप्लीकेट और अन्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया था। विपक्ष इस प्रक्रिया और उसके प्रभाव पर सवाल उठा रहा है।

‘ज्ञानेश कुमार CEC के पद पर नहीं टिकेंगे’: राहुल गांधी

राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष के पास कथित वोट चोरी को लेकर पर्याप्त सबूत हैं और ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर नहीं टिकेंगे। उन्होंने कहा कि देश की जनता की आवाज संसद में उठनी चाहिए, लेकिन जब विपक्ष को संसद में अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिलता, तो उसे ‘जन महाभियोग’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी बात सामने रखनी पड़ती है।

राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ केवल पद से हटाने की मांग तक सीमित न रहते हुए उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने और उन्हें न्याय के दायरे में लाने की मांग की। उन्होंने कहा कि विपक्ष, युवा और आम नागरिक इस लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे तथा कथित चुनावी अनियमितताओं को न तो भूलेंगे और न ही माफ करेंगे।

2023 के कानून और चुनाव आयुक्तों को मिली कानूनी सुरक्षा का मुद्दा

कार्यक्रम में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की कानूनी सुरक्षा से जुड़े प्रावधान को समाप्त करने या उसमें संशोधन करने की मांग भी उठाई गई। विपक्ष ने कहा कि दिसंबर 2023 में पारित कानून चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कार्यों के संबंध में व्यापक कानूनी संरक्षण देता है।

इस कानून की धारा 16 के तहत किसी वर्तमान या पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त अथवा चुनाव आयुक्त के आधिकारिक कर्तव्य या कार्य के निर्वहन के दौरान किए गए कार्य, कथन या गतिविधि के संबंध में अदालत किसी दीवानी या आपराधिक कार्यवाही को स्वीकार या जारी नहीं रख सकती। विपक्ष इस प्रावधान को जवाबदेही के रास्ते में बाधा मान रहा है।

विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि रहे मौजूद

कार्यक्रम में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राजद, माकपा, भाकपा, झारखंड मुक्ति मोर्चा, पीडीपी, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), एनसीपी (शरदचंद्र पवार) सहित कई विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

समाजवादी पार्टी से हरेंद्र सिंह मलिक और राजीव राय, तृणमूल कांग्रेस से सागरिका घोष और महुआ मोइत्रा, पीडीपी से महबूबा मुफ्ती, सांसद कपिल सिब्बल, शिवसेना (यूबीटी) से अरविंद सावंत, माकपा से जॉन ब्रिटास और अन्य नेताओं ने भी अपनी बात रखी।

सामाजिक कार्यकर्ताओं में स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव, निखिल डे, आरटीआई कार्यकर्ता अंजली भारद्वाज और छात्र नेताओं नेहा बोरा तथा ऋतु बराला ने प्रस्ताव के समर्थन में वक्तव्य दिए।

BJP ने कार्यक्रम को बताया संसद और लोकतंत्र का मजाक

विपक्ष के ‘जन महाभियोग’ कार्यक्रम पर भारतीय जनता पार्टी ने भी प्रतिक्रिया दी। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने विपक्ष की इस पहल को संसद और लोकतंत्र का मजाक बताया तथा SIR और चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों को खारिज किया। भाजपा ने विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप भी लगाया।

इस तरह मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका, मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण और चुनावी पारदर्शिता को लेकर सत्तापक्ष तथा विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है।

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