नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर साफ दिखाई देने लगा है। इस बीच भारत सरकार ने स्थिति को ध्यान में रखते हुए घरेलू उद्योगों को राहत देने के लिए कई अहम फैसले किए हैं। सरकार का उद्देश्य है कि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बावजूद देश के उत्पादन और निर्यात पर न्यूनतम असर पड़े।

हाल ही में हुई एक अंतर-मंत्रालयी बैठक में वस्त्र और हस्तशिल्प क्षेत्र को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया। इसके तहत इन उद्योगों को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में स्थिरता बनाए रखने का आश्वासन दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इन क्षेत्रों को पिछले छह महीनों की औसत खपत का लगभग 80 प्रतिशत गैस सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी, जिससे उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित न हो।
इसके अलावा, सरकार ने 29 प्रमुख टेक्सटाइल कच्चे माल पर सीमा शुल्क को अस्थायी रूप से टालने का फैसला किया है। इस कदम से उत्पादन लागत में कमी आएगी और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने में मदद मिलेगी। मंत्रालय अन्य जरूरी इनपुट्स जैसे MMF वैल्यू चेन और कपास पर भी शुल्क में राहत देने के विकल्प पर विचार कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक बाजार में अनिश्चितता चरम पर है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जिसका सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ता है। ऐसे में सरकार की यह पहल उद्योगों के लिए राहतकारी साबित हो सकती है।
आर्थिक जानकारों के अनुसार, इन उपायों से न केवल घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि निर्यात में भी स्थिरता आएगी। इससे रोजगार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

