संबंध को तोड़ो मत जोड़ो, तोड़ने में संबंध बिगडता है- मुनिपुंगव सुधासागर जी महाराज

निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव अभिषेक पद्धति प्रदाता 108श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन मे कहा संबंध को तोडो मत-संबंध को तोड़ो मत जोड़ो तोड़ने में संबंध बिगडता है छोड़ने में संबंध नहीं बिगड़ता,तोड़ने में कषाय आती है तोडने मैं सामने वाले को नष्ट कर देता है संबंध बिगाड़ने से,छोड़ने में संबंध रखने वालों को स्वत्रंत कर दिया जाता है,मां-बाप भाई,पत्नी से बोर हो गए हो तो सो सो भव तक ऐसी पर्याय मैं जाओगे कि नहीं स्त्री बनोगे ना पुरुष बनोगे,नपुंसक होंगे।

महाराज श्री कहते है की  मां बेटे से थक गई-मां के मन में विचार आ जाए कि बेटा कितनी रोटी खा रहा है मां थक गई है बेटे के लिए रोटी बना कर,बेटा बाप से थक गया तो समझना बाप पुण्य हीन बेटा सो सौ भव तक संतान नहीं मिलेगी, अनाथ होगा क्योंकि जो जिस से जो व्यक्ति थक गया है वह आपको नहीं मिलने वाली।

अभाव मे आंनद- अभाव में मजा है जो है उसमे मजा नहीं जो नहीं है उसमें मजा है विज्ञान क्या है तो सौधर्म इंद्र बनना चाह रहा है सोधर्मेंद्र मनुष्य बनना चाह रहा है स्वर्गो के सुख अच्छे हैं तो देवलोक मनुष्य क्यो बनना चाह रहा हैं।

पर की खबर स्वयं की नहीं-व्यक्ति को दुनिया की खबर है लेकिन स्वयं की खबर नहीं है अपने को नहीं पर को जानो व्यक्ति को अपने धन की खबर नहीं दूसरे के धन की खबर रखता है सुंदर व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को देख रहा है और दुसरा उसको देख रहा है जबकि स्वयं सुंदर है दूसरा व्यक्ति को स्वयं को देख रहा है खुश हो रहा हैं।

अतीत भुलो भविष्य को याद करो- संसार की तरह दृष्टि रखने वाले वह भविष्य की चिंता करता है विज्ञान क्या कहता है अतीत बोलो आगे बढ़ो अतीत के दुखों को भूल जाओ और आगे सुख इंतजार कर रहे हैं हम कल को याद कर के भविष्य को देखकर शेखचिल्ली बन रहे हैं भविष्य को देखकर आदमी सबसे ज्यादा पाप कर रहा है।

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