सुख विकल्पों में नहीं संकल्पों में मिलता है। दुनिया से जितना जुड़ोगे उतना दुख मिलेगा। 24 घण्टे सुख की खोज करो तो भी नहीं मिलता। जिसे जैसी संगति मिलती है। उसे वैसी ही मति मिलती है और मति अच्छी होगी तो आपको गति भी बहुत अच्छी मिलेगी। यह बात आर्यिका पूर्णमति माताजी ने ढाना में धर्म उपदेश देते हुए कही।
उन्होंने कहा कि जब बच्चा पैदा होता है तो पहले उसका संबंध दूध से होता है। फिर मां से होता है। फिर खिलौनों से होता है और फिर पढ़ाई से होता है। इसके बाद जीवन में तनाव शुरू होते हैं, जो जीवन रहने तक बने रहते हैं। पहले बच्चे 10-15 साल तक तनाव मुक्त जीवन जीते थे। लेकिन आजकल के बच्चे 3 साल के बाद जैसे ही स्कूलों में जाते हैं। तनाव शुरू हो जाता है। पहले बच्चों को बचपना रहता था। लेकिन अब नहीं है। इस कारण से जवानी भी खराब हो रही है और बुढ़ापा भी। उन्होंने कहा मंदिरों में भगवान के दर्शन करके सम्यक दर्शन प्राप्त होता है। भगवान की वाणी पर आपको विश्वास करना चाहिए। क्योंकि यह जिंदगी दो घड़ी की है और यदि आप के भाव पवित्र हैं। तब तक तो ठीक है। अन्यथा तेरी मेरी जब तक है तब तक हेराफेरी भी है। जितना दान करोगे उतना साथ लेकर जाओगे। समय आने पर आपको सब छोड़कर जाना है।

