नई दिल्ली, 15 जुलाई 2026। सद्गुरु द्वारा स्थापित ईशा आउटरीच के तत्वावधान में आयोजित देश का सबसे बड़ा वार्षिक ग्रामीण खेल महोत्सव ईशा ग्रामोत्सव 2026 इस वर्ष नए विस्तार के साथ आयोजित किया जाएगा। अपने 18वें संस्करण में यह प्रतिष्ठित ग्रामीण खेल आयोजन पहली बार उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र के गांवों तक पहुंचेगा। इसके साथ ही ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी भी इस आयोजन का हिस्सा होंगे।

इस वर्ष लगभग 10 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 40,000 गांवों से 80,000 से अधिक खिलाड़ी भाग लेंगे। करीब 7,000 टीमें इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगी, जिनमें लगभग 15,000 महिला खिलाड़ी शामिल होंगी। प्रतियोगिता में एक करोड़ रुपये से अधिक की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है।
विजेता टीमों को मिलेगा लाखों रुपये का पुरस्कार
टूर्नामेंट के ग्रैंड फिनाले में पुरुष वर्ग की वॉलीबॉल और महिला वर्ग की थ्रोबॉल प्रतियोगिताओं की विजेता टीमों को 5-5 लाख रुपये, जबकि उपविजेता टीमों को 3-3 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाली टीमों को क्रमशः 1 लाख रुपये और 50 हजार रुपये की पुरस्कार राशि मिलेगी। क्लस्टर और डिवीजन स्तर पर भी नकद पुरस्कार दिए जाएंगे। साथ ही पैरालंपिक श्रेणी के प्रतिभागियों के लिए विशेष पुरस्कार भी निर्धारित किए गए हैं।
उत्तर प्रदेश और हरियाणा में ऐसे होगा आयोजन
उत्तर प्रदेश में क्लस्टर स्तर के मुकाबले 25 और 26 जुलाई को लखनऊ, वाराणसी, मुजफ्फरनगर और मेरठ में आयोजित होंगे। इसके बाद 1 और 2 अगस्त को गौतम बुद्ध नगर में डिवीजनल मुकाबले होंगे।
हरियाणा में पहले चरण के मुकाबले पानीपत, करनाल और अंबाला में 25-26 जुलाई को होंगे, जबकि दूसरे चरण के मुकाबले हिसार और कुरुक्षेत्र में 1-2 अगस्त को आयोजित किए जाएंगे। डिवीजनल स्तर की प्रतियोगिता 9 अगस्त को करनाल में होगी।
6 सितंबर को आदियोगी के समक्ष होगा ग्रैंड फिनाले
प्रतियोगिता बहु-स्तरीय प्रारूप में आयोजित होगी, जिसमें क्लस्टर, डिवीजनल और ग्रैंड फिनाले शामिल हैं। ग्रैंड फिनाले 6 सितंबर 2026 को कोयंबटूर स्थित ईशा योग केंद्र में प्रतिष्ठित आदियोगी की प्रतिमा के समक्ष सद्गुरु की उपस्थिति में आयोजित किया जाएगा।
ग्रामीण प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच देने का प्रयास
ईशा ग्रामोत्सव के राष्ट्रीय समन्वयक स्वामी पुलका ने कहा कि यह आयोजन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं बल्कि ग्रामीण भारत की प्रतिभाओं को पहचान दिलाने का राष्ट्रीय मंच है।
उन्होंने कहा कि हर संस्करण के साथ ग्रामोत्सव का प्रभाव बढ़ रहा है और इस बार 80 हजार से अधिक खिलाड़ियों की भागीदारी इसे देश का सबसे बड़ा समुदाय आधारित ग्रामीण खेल आंदोलन बनाती है।
उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में पेशेवर खिलाड़ियों को शामिल नहीं किया जाता, ताकि ग्रामीण युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का निष्पक्ष अवसर मिल सके।
महिलाओं को मिला नया आत्मविश्वास
तमिलनाडु की थ्रोबॉल खिलाड़ी नंदिनी दुरईसामी ने बताया कि ग्रामोत्सव ने ग्रामीण महिलाओं को घर से बाहर निकलकर खेल के माध्यम से अपनी पहचान बनाने का अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि लगातार तीन वर्षों में उनकी टीम ने चैंपियन, उपविजेता और तीसरे स्थान तक का सफर तय किया है।
एक अन्य खिलाड़ी राजेश्वरी ने कहा कि गृहिणियां होने के बावजूद उन्होंने संघर्ष करते हुए खेल को अपनाया और आज वे आत्मविश्वास के साथ प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रही हैं।
वहीं तमिलनाडु के मछुआरे और वॉलीबॉल खिलाड़ी मणिकंदन ने कहा कि ईशा ग्रामोत्सव ने यह साबित किया है कि गांवों के युवा भी राष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल कर सकते हैं।
ग्रामीण भारत में सामाजिक परिवर्तन का माध्यम
सद्गुरु ने खेलों के महत्व पर कहा कि “जीवन के प्रति खेलपूर्ण होना ही सबसे जिम्मेदार जीवनशैली है। खेल व्यक्ति को हर परिस्थिति का सकारात्मक ढंग से सामना करना सिखाते हैं।”
स्वामी पुलका ने बताया कि वर्ष 2004 में शुरू किया गया ईशा ग्रामोत्सव आज केवल खेल प्रतियोगिता नहीं बल्कि ग्रामीण भारत में सामाजिक परिवर्तन का अभियान बन चुका है। यह आयोजन युवाओं को नशे और सामाजिक बुराइयों से दूर रखकर स्वस्थ जीवनशैली, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समरसता और सामुदायिक एकता को बढ़ावा देता है।
अब तक इस पहल से 35 हजार से अधिक गांवों के 2.6 लाख से अधिक ग्रामीण खिलाड़ी जुड़ चुके हैं।
पंजीकरण शुरू
ईशा ग्रामोत्सव 2026 के लिए पंजीकरण शुरू हो चुका है। ग्रामीण खिलाड़ी वॉलीबॉल (पुरुष) और थ्रोबॉल (महिला) प्रतियोगिताओं के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आयोजन से जुड़ी अधिक जानकारी और पंजीकरण की सुविधा आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में ईशा ग्रामोत्सव 2026 को देश के सबसे बड़े ग्रामीण खेल आंदोलन के रूप में देखा जा रहा है। इस बार उत्तर भारत तक इसका विस्तार लाखों ग्रामीण युवाओं के लिए नए अवसरों का द्वार खोलेगा।


