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जैन समाज की सेवा, त्याग और अहिंसा की परंपरा समाज के लिए प्रेरणादायी — उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन

मुंबई, 21 मार्च: मुंबई में आयोजित 64वें जैन दीक्षा समारोह ने एक बार फिर जैन धर्म की अहिंसा, त्याग और संयम की परंपरा को प्रमुखता से सामने रखा। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan ने कहा कि जैन समाज की सेवा और दान की भावना पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

दरबार हॉल, लोकभवन में आयोजित इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के राज्यपाल Jishnu Dev Varma, मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis और मंत्री Mangal Prabhat Lodha सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

🕊️ अहिंसा और आध्यात्मिक जीवनशैली का संदेश

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा कि जैन धर्म केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि एक ऐसी जीवनशैली है जो अहिंसा, अपरिग्रह और सहिष्णुता पर आधारित है। उन्होंने बताया कि Mahavira का संदेश आज के भौतिकवादी युग में और भी प्रासंगिक हो गया है।

64 लोगों द्वारा दीक्षा ग्रहण करना समाज के लिए एक बड़ा संदेश है, जो त्याग, आत्मसंयम और आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित करता है।

🌍 वैश्विक संदर्भ में जैन धर्म की प्रासंगिकता

राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में जैन धर्म के सिद्धांत शांति और संतुलन का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ते उपभोक्तावाद के बीच संयम और सादगी का महत्व और भी बढ़ जाता है।

🏛️ प्राचीन विरासत के संरक्षण पर जोर

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जैन समाज से प्राचीन मंदिरों और हस्तलिखित ग्रंथों के संरक्षण में आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि जैन समाज का योगदान न केवल आर्थिक क्षेत्र में बल्कि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण है।

🏅 सम्मान और प्रदर्शनी का आयोजन

कार्यक्रम के दौरान जैन समाज के विकास में योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। साथ ही Mahavir Jayanti के उपलक्ष्य में ‘अष्ट द्रव्य’ जैन पूजन सामग्री की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही।

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