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महावीर जयंती पर दिल्ली विधानसभा में विशेष आयोजन, नेताओं ने दिया शांति और अहिंसा का संदेश

नई दिल्ली: भगवान महावीर के 2625वें जन्म कल्याणक वर्ष के उपलक्ष्य में दिल्ली विधानसभा परिसर में ‘भगवान महावीर गुणानुवाद’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम Jain Samaj Delhi के सहयोग से आयोजित हुआ, जिसमें जैन संतों, जनप्रतिनिधियों और समाज के अनेक गणमान्य लोगों ने भाग लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष Vijender Gupta ने कहा, “आज हम जिस स्थान पर खड़े हैं, वह ‘सेवा परमो धर्मः’ के सिद्धांत का जीवंत प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि निस्वार्थ सेवा केवल कर्तव्य नहीं बल्कि धर्म का सर्वोच्च स्वरूप है।”

उन्होंने भगवान महावीर के ‘अनेकांतवाद’ सिद्धांत को लोकतांत्रिक मूल्यों की आधारशिला बताते हुए कहा कि सत्य के कई आयाम होते हैं और दूसरों के दृष्टिकोण का सम्मान करना ही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है। उन्होंने कहा कि वैचारिक मतभेद लोकतंत्र की कमजोरी नहीं बल्कि उसकी शक्ति हैं, यदि उन्हें सम्मान और धैर्य के साथ स्वीकार किया जाए। श्री गुप्ता ने युवाओं से आह्वान किया कि वे भगवान महावीर को केवल धार्मिक प्रतीक के रूप में न देखें, बल्कि उनकी शिक्षाओं को आधुनिक जीवनशैली का मार्गदर्शन मानें।

संयम और अहिंसा का मार्ग मानवता के लिए सबसे बड़ा मार्गदर्शक : मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता

इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने कहा कि आज के भौतिकवादी और अशांत समय में भगवान महावीर का संयम और अहिंसा का मार्ग मानवता के लिए सबसे बड़ा मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि अहिंसा केवल धार्मिक शिक्षा नहीं बल्कि वैश्विक शांति और मानवीय गरिमा की रक्षा का व्यावहारिक मार्ग है।

कार्यक्रम में दिल्ली विधानसभा के उपाध्यक्ष Mohan Singh Bisht ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज के वैश्विक तनाव के दौर में अहिंसा, करुणा और संयम जैसे मूल्य व्यक्तिगत शांति और राष्ट्रीय प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

यह आध्यात्मिक सभा जैन संत Pragya Sagar Muni के दिव्य सानिध्य और प्रेरणा में आयोजित हुई। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि भगवान महावीर और भगवान हनुमान की तपस्या हमें जीवन जीने की सच्ची कला सिखाती है। वहीं Acharya Lokesh Muni ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के संदेश को दोहराते हुए विश्व शांति और मानवता की एकता का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में समाज और राष्ट्र के लिए शांति, सह-अस्तित्व और नैतिक मूल्यों को अपनाने का संकल्प लिया गया।

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