कोलकाता : Suvendu Adhikari ने पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर राज्य की राजनीति में नया अध्याय शुरू कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी लंबे समय से बंगाल की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं और अब उन्हें राज्य की कमान सौंपी गई है।

करीब 30 वर्षों के सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे सुवेंदु अधिकारी ने अविवाहित रहकर जनसेवा को अपना लक्ष्य बनाया। उनके पास दो दशक से अधिक का विधायी अनुभव है। वह दो बार लोकसभा सांसद, तीन बार विधायक और पांच वर्षों तक पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा वे तीन बार पार्षद और कांथी नगरपालिका के चेयरमैन भी रहे हैं।
सुवेंदु अधिकारी प्रशासनिक अनुभव के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने परिवहन और सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण विभागों में कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य किया। साथ ही हुगली रिवर ब्रिज कमीशन के चेयरपर्सन की जिम्मेदारी भी संभाली। हल्दिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने औद्योगिक शहर हल्दिया के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सहकारिता आंदोलन में भी सुवेंदु अधिकारी की मजबूत पकड़ रही है। उन्होंने कृषि ग्रामीण बैंक, कांथी अर्बन कोऑपरेटिव और विद्यासागर सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक जैसे संस्थानों में नेतृत्वकारी भूमिका निभाई।
सुवेंदु अधिकारी का परिवार स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़ा रहा है। कांथी के प्रसिद्ध अधिकारी परिवार के सदस्य रहे बिपिन अधिकारी और केनाराम अधिकारी स्वतंत्रता सेनानियों के करीबी सहयोगी थे। ब्रिटिश शासन के दौरान उनके परिवार को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और उनका घर दो बार जलाया गया था।
1970 में पूर्व मेदिनीपुर जिले के करकुली गांव में जन्मे सुवेंदु अधिकारी ने रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से एमए की पढ़ाई की है। अब मुख्यमंत्री बनने के बाद उन पर पश्चिम बंगाल में विकास, कानून व्यवस्था और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

