- डॉ. निर्मल जैन, जज (से.नि.)
हमारे देश के पाँच हज़ार साल के इतिहास में हम कुल तीन पीढ़ियाँ है जो अपने स्वयं के राजा हैं। अपनी इस स्वतंत्रता की रक्षा हेतु मतदान करना हमारा परम कर्तव्य है। यदि अपने जीवन और अपने अधिकारों के प्रति भी हम उदासीन रहेंगे तो हम किसी और को हमारी दुर्दशा का उत्तरदायी नहीं मान सकते। लोकतंत्र अर्थात जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए शासन, इस विचार और दर्शन को मतदान के माध्यम से ही वास्तविकता में बदला जा सकता है।
लोकतांत्रिक प्रणाली में भारतीय नागरिक को जितने अधिकार मिलते हैं उनमें से सबसे महत्वपूर्ण अधिकार मतदान का है। इसलिए हर मतदाता को अपने मताधिकार का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। देश के संविधान लागू होने के साथ लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति-सम्पन्न संस्था भारत निर्वाचन आयोग का गठन किया गया। चुनाव आयोग हर मतदाता को एक खास निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत होने का अधिकार देता है। ऐसे में अगर कोई स्थायी तौर पर उस निर्वाचन क्षेत्र में मौजूद नहीं है तो वो अस्थायी निवास वाले स्थान पर अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वा सकते हैं। लेकिन एक चुनाव में एक ही बार मतदान करने का अधिकार है।
मतदान का अधिकार
भारत के सभी 18 और उससे अधिक आयु प्राप्त नागरिक मतदान के अधिकारी होते हैं। केवल उन लोगों के अलावा जिन्हे भारतीय दंड संहिता की धारा 171 (ई) रिश्वतखोरी और धारा 171 (एफ) किसी चुनाव में व्यक्ति या अनुचित प्रभाव से संबंधित है के तहत अयोग्य ठहराया जाता है। इसके अतिरिक्त धारा 125, धारा 135 और धारा 136 के तहत अपराधों का दोषी पाया जाता है, वो भी अयोग्य माने जाते हैं। भारतीय चुनावों को गैर-अपराधीकरण करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग और न्यायपालिका ने सुनिश्चित किया है कि उम्मीदवार अपनी चल-अचल परिसंपत्तियों की घोषणा के साथ अपने आपराधिक रिकॉर्ड और किसी भी मामले के लंबित होने या न होने की घोषणा करें।
मतदाता का मतदान में हिस्सा लेना बेहद जरूरी
लोकतंत्र को जीवंत रखने के लिए हर मतदाता का मतदान में हिस्सा लेना बेहद जरूरी है। किसी लालच या नशा आदि के प्रभाव तहत वोट ना डालें बल्कि सोच समझ कर सही उम्मीदवार को चुने ताकि अपनी पसंद की सरकार बना सकें। यह तब ही होगा जब घर से निकल कर मतदान केंद्र में वोट डालने जाएंगे। केवल वोट डालना ही नहीं अपितु योग्य कर्तव्यनिष्ठ, कर्मठ एवं जिसके लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि हो उसको चुनने के लिए अपना वोट का सही उपयोग करना भी बहुत जरूरी है। अपने इसी विवेक से मतदान कर हम बदलाव और विकास की दिशा तय कर सकते हैं।
देश का चुनाव कानून नागरिकों को न केवल मतदान का अधिकार प्रदान करता है बल्कि चुनाव के दौरान मतदान से बचने का भी अधिकार देता है। विधिक रूप से मतदान करना अनिवार्यता न होने पर भी हम सबके लिए यह नैतिक बाध्यता है कि अपनी भारतीय नागरिकता का सम्मान करते हुए इस लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए वोट जरूर डालें। नोटा का चयन कर मतदाताओं को किसी भी मनोनीत उम्मीदवार को न चुनने का अधिकार है। लेकिन इसका उपयोग जब कोई विकल्प न हो तब ही किया जाना चाहिए।
भारतीय लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब मीडिया सहित सभी राजनीतिक दल, हितधारक अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लें और चुनाव प्रणाली जैसी लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में एक-दूसरे की मदद करें। विशेष कर नई पीढ़ी जिसकी सोच-समझ नई है अपनी उसी सूझ-बूझ के समर्थक जन-प्रतिनिधियों को सत्तारूढ़ कर सके इसलिए उसे निश्चित रूप से मतदान में भाग लेना चाहिये। नीति और अनीति में युद्ध घमासान है, अस्त्र जीत का तेरा सिर्फ मतदान है। राजा हो या रंक हो आज सब समान हैं। किसी में फर्क कुछ भी नहीं मत ही बस पहचान है। तो चल उठ मतदान कर, क्या फर्क वृद्ध है या जवान है। देश इस महायज्ञ में माँगे सबका योगदान है।
मतदान दिवस पर सार्वजनिक अवकाश इसलिए होता है कि सभी मतदाता अपनी अन्य व्यस्तताओं से बेफिक्र हो मतदान कर सकें। मतदान एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है और मतदान करने जाना हम सभी का मौलिक एवं नैतिक दायित्व है। हमारा सबका अच्छा वर्तमान व उज्जवल भविष्य ही देश को समृद्ध व विकसित बनाने का मार्ग प्रशस्त करता है। अपने व भावी पीढ़ियों के बेहतर व उज्जवल भविष्य एवं अच्छे सामाजिक बदलाव के लिए मतदान करें। मतदान दिवस, मौज-मस्ती के लिए अवकाश दिवस नहीं, कर्तव्य दिवस है।

