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बकरीद से पहले दिल्ली सरकार सख्त, सार्वजनिक जगहों पर कुर्बानी और पशु खरीद-बिक्री पर रोक

नई दिल्ली, 21 मई 2026 : दिल्ली सरकार के विकास मंत्री कपिल मिश्रा ने आगामी बकरीद को देखते हुए अधिकारियों को पशु कल्याण और सार्वजनिक स्वच्छता से जुड़े कानूनों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। विकास विभाग के साथ हुई समीक्षा बैठक में उन्होंने साफ कहा कि गाय, बछड़े, ऊँट और अन्य प्रतिबंधित जानवरों की हत्या या कुर्बानी पर पूर्ण प्रतिबंध का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।

मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि बकरीद के दौरान केवल अधिकृत और निर्धारित स्थानों पर ही कुर्बानी की अनुमति होगी। सड़कों, गलियों, नालों के किनारे या किसी भी सार्वजनिक स्थल पर कुर्बानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सार्वजनिक स्थानों पर पशुओं की खरीद-बिक्री भी गैरकानूनी है और ऐसी किसी भी शिकायत पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए।

बैठक में कपिल मिश्रा ने पशुओं के अवैध परिवहन, अवैध बूचड़खानों और पशुओं के प्रति क्रूरता के मामलों में आपराधिक मामला दर्ज कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 के तहत पशुओं के साथ क्रूरता दंडनीय अपराध है, इसलिए कानून के उल्लंघन पर किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं होनी चाहिए।

मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि कुर्बानी के बाद जानवरों का खून सड़क, नालियों या नहरों में न बहे और अवशेषों को खुले में न फेंका जाए। इसके लिए संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ निगरानी करने और तय सुरक्षित मानकों के अनुसार निपटान सुनिश्चित करने को कहा गया है।

कपिल मिश्रा ने कहा कि भारत सरकार के पशु कल्याण बोर्ड द्वारा राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार पशु संरक्षण और कल्याण से जुड़े कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों को संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि पशु संरक्षण केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक जिम्मेदारी भी है। मंत्री ने नागरिकों से अपील की कि यदि कहीं पशुओं के अवैध परिवहन, क्रूरता या अवैध कुर्बानी की जानकारी मिले तो तत्काल प्रशासन या पुलिस को सूचित करें।

विकास मंत्री ने जन-जागरूकता अभियान चलाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पोस्टर, सोशल मीडिया और अन्य संचार माध्यमों के जरिए लोगों को पशु कल्याण कानूनों और नागरिक जिम्मेदारियों की जानकारी दी जाए, ताकि त्योहार के दौरान कानून व्यवस्था, स्वच्छता और पशु संवेदनशीलता बनी रहे।

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