दिल्ली विश्वविद्यालय में भर्ती के नाम पर कथित वसूली रैकेट का मामला, प्रोफेसर की बर्खास्तगी पर FIR के आदेश का दावा

सांसद कर्मवीर सिंह बौद्ध ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गंभीर आरोप, डॉ. अंकिता किलसन की बर्खास्तगी को बताया अवैध; कोर्ट के आदेश और दस्तावेज मीडिया के सामने रखने की बात

नई दिल्ली, 22 सितंबर 2026। दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े कथित भर्ती अनियमितताओं और भारती कॉलेज की पूर्व असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंकिता किलसन की बर्खास्तगी के मामले को लेकर सांसद कर्मवीर सिंह बौद्ध ने मंगलवार को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में नियुक्तियों के नाम पर धन वसूली से जुड़ा एक कथित रैकेट सक्रिय था और इसके खिलाफ आवाज उठाने के कारण डॉ. किलसन को कथित तौर पर निशाना बनाया गया।

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सांसद कर्मवीर सिंह बौद्ध ने कहा कि यह मामला केवल एक शिक्षिका की सेवा समाप्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार, डॉ. अंकिता किलसन ने कथित तौर पर भर्ती के नाम पर पैसे लिए जाने के मामले में आवाज उठाई थी, जिसके बाद उन्हें सेवा से हटाने की कार्रवाई की गई।

भर्ती के नाम पर धन वसूली का आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सांसद ने आरोप लगाया कि दिल्ली विश्वविद्यालय में नौकरियों के नाम पर धन की कथित वसूली से जुड़ा एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे आरोपों की जांच होती है और वे सही पाए जाते हैं, तो इससे योग्य अभ्यर्थियों के अधिकार और विश्वविद्यालय की भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठते हैं।

सांसद के मुताबिक, डॉ. अंकिता किलसन ने कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाई और इसके बाद उनकी सेवा समाप्त कर दी गई। उन्होंने इस बर्खास्तगी को गैर-कानूनी बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

कोर्ट के FIR आदेश का दावा

सांसद कर्मवीर सिंह बौद्ध ने दावा किया कि मामले में संबंधित न्यायालय ने आरोपों को गंभीरता से लेते हुए कथित साजिश में शामिल लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कोर्ट के आदेश की प्रति और मामले से संबंधित दस्तावेज मीडिया के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की बात भी कही गई।

हालांकि, एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया, जांच की स्थिति और आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम पर निर्भर करेगी।

उच्च शिक्षा में पारदर्शिता का मुद्दा

सांसद ने कहा कि विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में नियुक्तियां योग्यता, पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी प्रकार की धन उगाही या प्रभाव का इस्तेमाल साबित होता है, तो इससे न केवल उम्मीदवारों के अधिकार प्रभावित होते हैं, बल्कि संस्थान की प्रतिष्ठा पर भी असर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा की संस्थागत विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए कथित भ्रष्टाचार के मामलों की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।

डॉ. अंकिता किलसन के मामले को लेकर उठे सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. अंकिता किलसन की सेवा समाप्ति को भी प्रमुख मुद्दा बनाया गया। सांसद ने आरोप लगाया कि उनकी बर्खास्तगी नियमों के अनुरूप नहीं थी और इसे कथित तौर पर भर्ती संबंधी अनियमितताओं के खिलाफ उनकी आवाज उठाने से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

सांसद ने कहा कि इस मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और न्यायालय के आदेश के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

“उच्च शिक्षा की पवित्रता बचाने के लिए कार्रवाई जरूरी”

सांसद कर्मवीर सिंह बौद्ध ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में काम करने वाले ईमानदार शिक्षाविदों को किसी भी प्रकार के दबाव या उत्पीड़न से सुरक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने कथित भर्ती रैकेट की जांच और मामले को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में नियुक्तियों की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और कथित भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए सामूहिक एवं संस्थागत प्रयास आवश्यक हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन नई दिल्ली स्थित हरियाणा भवन, कॉपरनिकस मार्ग, मंडी हाउस मेट्रो के निकट किया गया। इस दौरान मामले से संबंधित न्यायालय के आदेश और अन्य दस्तावेज मीडिया प्रतिनिधियों के समक्ष रखे गए।

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