नई दिल्ली। दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम दिल्ली के प्रदूषण हॉटस्पॉट की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) की निगरानी और जमीनी निरीक्षण के आधार पर प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करने, ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP-1) के प्रावधानों का पालन कराने तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया।
23 अक्टूबर को जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में संबंधित विधायक, जिलाधिकारी, पुलिस, नगर निगम (MCD), लोक निर्माण विभाग (PWD), मेट्रो, रेलवे, ट्रैफिक पुलिस और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में सड़क की धूल, ट्रैफिक जाम, धीमी यातायात गति, अतिक्रमण, निर्माण गतिविधियों, क्रेमेटोरियम और खुले में कूड़ा एवं बायोमास जलाने सहित प्रदूषण के विभिन्न संभावित स्रोतों की समीक्षा की गई।
AQI के आंकड़ों से चिह्नित होंगे प्रदूषण हॉटस्पॉट
पर्यावरण मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि AQI मॉनिटरिंग स्टेशनों से प्राप्त आंकड़ों और जमीनी निरीक्षण के आधार पर प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों की पहचान की जाए। चिह्नित स्थानों पर सड़क की धूल, भारी यातायात, वाहनों से उत्सर्जन, निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों और अवैध पार्किंग जैसे स्रोतों का आकलन किया जाए।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक हॉटस्पॉट के लिए स्रोत-विशिष्ट कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए। इसमें सुधारात्मक कदम, जिम्मेदार विभाग और कार्रवाई पूरी करने की समयसीमा स्पष्ट होनी चाहिए। संवेदनशील स्थानों पर PM10 और PM2.5 के स्तर की निगरानी करते हुए अधिक प्रदूषण वाले क्षेत्रों में लक्षित निरीक्षण और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।
सिरसा ने कहा कि जिला स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकों का उद्देश्य प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करना, रोकथाम के उपायों का आकलन करना और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के जरिए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

GRAP-1 के नियमों का पालन कराने के निर्देश
बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को GRAP-1 के तहत लागू प्रावधानों और प्रदूषण नियंत्रण उपायों का पालन सुनिश्चित करने को कहा। निर्माण स्थलों और मलबा संग्रहण स्थलों पर धूल नियंत्रण के निर्धारित मानकों का अनुपालन कराने तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने खुले में कूड़ा, बायोमास, प्लास्टिक, रबर और अन्य ज्वलनशील अपशिष्ट जलाने पर रोक प्रभावी ढंग से लागू करने पर भी जोर दिया। संबंधित एजेंसियों को नियमित निरीक्षण करने और कचरे के उचित संग्रह, पृथक्करण, परिवहन तथा वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहा गया, ताकि कचरे के जमाव और उसे जलाने की घटनाओं को रोका जा सके।
भारी वाहनों और ट्रैफिक जाम पर विशेष निगरानी
समीक्षा बैठक में ट्रैफिक प्रबंधन को प्रदूषण नियंत्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया। मंत्री के अनुसार, ट्रैफिक जाम और वाहनों की धीमी गति से उत्सर्जन बढ़ सकता है, इसलिए यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय जरूरी है।
उन्होंने दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और संबंधित अधिकारियों को दिल्ली की सीमाओं से आने वाले गैर-दिल्ली भारी वाहनों की आवाजाही व्यवस्थित करने के निर्देश दिए। दिल्ली के भीतर चलने वाले भारी वाहनों का प्रबंधन भी इस तरह करने पर जोर दिया गया कि व्यस्त समय में अनावश्यक जाम न लगे और यातायात सुचारु बना रहे।
मंत्री ने अवैध पार्किंग के खिलाफ कार्रवाई करने और यातायात बाधित करने वाले स्थानों पर आवश्यक कदम उठाने को भी कहा।
सड़क की धूल और अतिक्रमण कम करने पर जोर
मनजिंदर सिंह सिरसा ने संबंधित एजेंसियों को सड़कों से अवैध अतिक्रमण हटाने, अवैध पार्किंग पर रोक लगाने, गड्ढों की मरम्मत करने और सड़क किनारे खुले मिट्टी वाले क्षेत्रों का उपचार करने के निर्देश दिए।
सड़क की धूल को नियंत्रित करने के लिए नियमित और प्रभावी पानी के छिड़काव तथा संवेदनशील स्थानों पर निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया। इसके अलावा, भविष्य में होने वाले उपयुक्त सड़क कार्यों में तकनीकी रूप से संभव होने पर सड़क और उसके किनारे के हिस्सों की एंड-टू-एंड कारपेटिंग या पक्की सतह विकसित करने पर जोर दिया गया, ताकि खुली मिट्टी से उड़ने वाली धूल को कम किया जा सके।
दिल्लीवासियों से कूड़ा नहीं जलाने और PUC जांच कराने की अपील
पर्यावरण मंत्री ने नागरिकों से प्रदूषण नियंत्रण में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण कम करने की जिम्मेदारी केवल सरकारी विभागों की नहीं है, बल्कि नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है।
उन्होंने दिल्लीवासियों से कूड़ा नहीं जलाने, सड़कों पर कचरा नहीं फेंकने और वाहनों की नियमित प्रदूषण जांच कराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) के बिना वाहन सड़क पर नहीं चलाने चाहिए। दोपहिया वाहन चालकों को भी अपने वाहनों के प्रदूषण स्तर के प्रति जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
मंत्री ने जहां संभव हो, निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करने, कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन अपनाने तथा इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ने की अपील भी की।
कार्रवाई की रिपोर्ट अगली समीक्षा बैठक में होगी पेश
पर्यावरण मंत्री ने सभी संबंधित विभागों को चिन्हित प्रदूषण स्रोतों पर की गई कार्रवाई की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को अपनी कार्रवाई, मौजूदा स्थिति, लंबित कार्यों और उन्हें पूरा करने की समयसीमा का विवरण देते हुए एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने को कहा गया है।
इस रिपोर्ट के आधार पर अगली समीक्षा बैठक में कार्रवाई की प्रगति का आकलन किया जाएगा। मंत्री ने दोहराया कि प्रदूषण के स्रोतों की पहचान कर उन्हीं स्थानों पर कार्रवाई करना, नियमित निगरानी करना और विभागों की जवाबदेही तय करना सरकार की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली की हवा को स्वच्छ रखने के लिए सरकार और नागरिकों को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी, क्योंकि यह बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा विषय है।


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