नई दिल्ली, 16 जुलाई 2026। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के 98वें स्थापना दिवस के अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विकसित कृषि और समृद्ध किसान का व्यापक विज़न प्रस्तुत किया। नई दिल्ली स्थित भारत रत्न सी. सुब्रमणियम ऑडिटोरियम, NASC कॉम्प्लेक्स में आयोजित समारोह में उन्होंने किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने, जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने, नकली बीज और कीटनाशकों पर सख्त कानून बनाने तथा कृषि अनुसंधान को सीधे खेत तक पहुंचाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
समारोह में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, भागीरथ चौधरी, प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट सहित बड़ी संख्या में वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ और अधिकारी उपस्थित रहे।

किसानों और वैज्ञानिकों की साझेदारी से बनेगा विकसित भारत
अपने संबोधन में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसान देश की आत्मा हैं और वैज्ञानिक उसका मस्तिष्क। जब किसानों का परिश्रम, वैज्ञानिकों की प्रतिभा और सरकार की नीतियां एक साथ काम करती हैं, तभी कृषि क्षेत्र में वास्तविक परिवर्तन संभव होता है।
उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि उन वैज्ञानिकों और किसानों को सम्मान देने का अवसर है, जिन्होंने भारत को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
150 से अधिक कर्मचारियों को पहली बार मिली नियमित नियुक्ति
समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री ने ICAR के 150 से अधिक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को पहली बार नियमित नियुक्ति पत्र सौंपे। उन्होंने कहा कि वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों को उनका अधिकार दिलाना ICAR परिवार की बड़ी उपलब्धि है।
43 नई वैराइटी, 17 नई तकनीक और 14 प्रकाशनों का लोकार्पण
स्थापना दिवस पर किसानों के लिए 43 नई फसल किस्मों, 17 नई तकनीकों एवं उत्पादों तथा 14 महत्वपूर्ण प्रकाशनों का लोकार्पण किया गया।
इनमें रोग प्रतिरोधी फसलें, पोषणयुक्त किस्में, पशुधन एवं मत्स्य पालन के लिए नई वैक्सीन, डिजिटल कृषि समाधान और आधुनिक कृषि तकनीकें शामिल हैं। कार्यक्रम में 70 से अधिक तकनीकी लाइसेंसिंग और एमओयू भी किए गए, जिससे इन तकनीकों को तेजी से किसानों तक पहुंचाया जा सके।
100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज बनाने का लक्ष्य
शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की कि ICAR के 100वें स्थापना वर्ष से पहले देशभर में 100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज विकसित किए जाएंगे।
इन गांवों में जलवायु अनुकूल खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली, जल संरक्षण, मृदा संरक्षण और जोखिम कम करने वाली आधुनिक तकनीकों को अपनाया जाएगा, ताकि बदलते मौसम के बावजूद किसानों की आय सुरक्षित रहे।
हर संस्थान देगा एक बड़ा इनोवेशन
केंद्रीय मंत्री ने “वन इंस्टिट्यूट–वन ग्रैंड इनोवेशन” पहल की घोषणा करते हुए कहा कि ICAR का प्रत्येक संस्थान अगले दो वर्षों में कम से कम एक ऐसी तकनीक विकसित करेगा, जिसका राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रभाव पड़े।
यह तकनीक नई फसल किस्म, वैक्सीन, डिजिटल समाधान या जलवायु अनुकूल कृषि मॉडल के रूप में हो सकती है।

10 करोड़ किसानों तक पहुंचेगी ICAR की तकनीक
उन्होंने ICAR को लक्ष्य दिया कि 100वें स्थापना वर्ष तक उसकी वैज्ञानिक तकनीक और आधुनिक कृषि समाधान 10 करोड़ किसानों तक पहुंचाए जाएं।
उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा जब उसका लाभ सीधे खेत और किसान तक पहुंचे।
कृषि विज्ञान केंद्र बनेंगे इनोवेशन हब
केंद्रीय मंत्री ने “मिशन ICAR-100” के तहत कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) की भूमिका को और मजबूत बनाने की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि अब KVK केवल प्रशिक्षण केंद्र नहीं रहेंगे, बल्कि इन्हें इनोवेशन हब, क्लाइमेट एडवाइजरी सेंटर, स्टार्टअप सपोर्ट सेंटर और किसान टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा।
हर किसान के मोबाइल पर पहुंचेगी वैज्ञानिक जानकारी
शिवराज सिंह चौहान ने ICAR ओपन डिजिटल नॉलेज प्लेटफॉर्म शुरू करने की घोषणा की, जिसके माध्यम से किसान अपने मोबाइल फोन पर मुफ्त में वैज्ञानिक सलाह, वीडियो, मौसम, मृदा परीक्षण, फसल प्रबंधन और बाजार संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को मोबाइल आधारित बनाना समय की आवश्यकता है।
नकली बीज और कीटनाशकों पर बनेगा सख्त कानून
केंद्रीय मंत्री ने किसानों की शिकायतों का उल्लेख करते हुए कहा कि नकली बीज और घटिया कीटनाशकों के खिलाफ सख्त कानून बनाए जाएंगे।
उन्होंने वैज्ञानिकों से ऐसी तकनीक विकसित करने का भी आग्रह किया, जिससे खेत पर ही बीज और कीटनाशकों की गुणवत्ता की तुरंत जांच की जा सके।
2029 तक 10,000 करोड़ रुपये की आत्मनिर्भरता का लक्ष्य
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ICAR को केवल सरकारी बजट पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
उन्होंने लक्ष्य रखा कि वर्ष 2029 तक ICAR अपनी तकनीकों, वैक्सीन, नई वैराइटी और लाइसेंसिंग के माध्यम से 10,000 करोड़ रुपये की आंतरिक संसाधन क्षमता विकसित करे, ताकि संस्थान आर्थिक रूप से और अधिक आत्मनिर्भर बन सके।
गुणवत्ता आधारित कृषि पर दिया जोर
उन्होंने कहा कि अब केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि गुणवत्ता आधारित कृषि को बढ़ावा देना होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नए मुक्त व्यापार समझौतों और वैश्विक बाजारों के खुलने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि को निर्यातोन्मुख, उच्च गुणवत्ता वाली और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित बनाना समय की मांग है।
वैज्ञानिकों से किया मिशन भावना के साथ काम करने का आह्वान
अपने संबोधन के अंत में शिवराज सिंह चौहान ने वैज्ञानिकों से कहा कि उनकी नौकरी केवल रोजगार नहीं बल्कि देश निर्माण का मिशन है।
उन्होंने वैज्ञानिकों से किसानों के जीवन में बदलाव लाने वाले नवाचार विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा कि विकसित भारत 2047 का सपना तभी साकार होगा, जब विकसित कृषि और समृद्ध किसान उसकी मजबूत नींव बनेंगे।


