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निर्यात बढ़ाने के लिए गुणवत्ता, पैकेजिंग और भरोसा जरूरी : पीयूष गोयल

मुंबई, 22 अप्रैल : उत्तर मुंबई के सांसद और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज कांदिवली को-ऑपरेटिव इंडस्ट्रियल एस्टेट लिमिटेड (KCIEL) में उद्यमियों और MSME प्रतिनिधियों से संवाद करते हुए भारत की आर्थिक प्रगति के लिए आत्मनिर्भरता, गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर आधारित मजबूत रोडमैप प्रस्तुत किया।

उद्यमियों से बातचीत के दौरान पीयूष गोयल ने उद्योगों से मजबूत और लचीली सप्लाई चेन विकसित करने का आह्वान किया, ताकि ब्लॉकेड, आपातकालीन परिस्थितियों, कोविड जैसी महामारी या अंतरराष्ट्रीय संघर्ष के समय भी कारोबार प्रभावित न हो।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सफलता के लिए गुणवत्ता और पैकेजिंग को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि केवल अच्छा उत्पाद बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे आकर्षक और सही तरीके से प्रस्तुत करना भी जरूरी है।

“ब्रांड इंडिया” को मजबूत बनाने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि जैसे स्विट्जरलैंड, जापान और जर्मनी अपने गुणवत्ता और विश्वसनीयता के लिए जाने जाते हैं, वैसे ही “मेड इन इंडिया” उत्पादों पर भी दुनिया का भरोसा होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जीवन के हर क्षेत्र में गुणवत्ता की आदत विकसित करनी होगी। उत्पादन प्रक्रिया से लेकर स्वच्छता, निरंतरता और बारीकी जैसे दैनिक पहलुओं में भी गुणवत्ता दिखाई देनी चाहिए।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाए गए जन विश्वास बिल 1 & 2 का उल्लेख करते हुए पीयूष गोयल ने उद्योग जगत से सुझाव मांगे कि इसमें और किन क्षेत्रों को शामिल किया जा सकता है, ताकि अनुपालन का बोझ कम हो और विश्वास आधारित शासन को मजबूती मिले।

क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (QCI) के साथ चल रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि कांदिवली जैसे औद्योगिक क्लस्टर में टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्टिफिकेशन सपोर्ट और ZED, Lean, Kaizen जैसे वैश्विक मानकों को लागू करने पर काम किया जा रहा है। साथ ही क्वालिटी सेल, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और निर्यात क्षमता बढ़ाने के लिए जरूरी सुविधाओं की योजना भी बनाई जा रही है।

पीयूष गोयल ने कहा कि गुणवत्ता केवल उत्पादों तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवाओं में भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। भारत का हॉस्पिटैलिटी सेक्टर और खानपान विश्व स्तर पर उत्कृष्ट है, लेकिन इसमें निरंतरता और मानकीकरण भी जरूरी है।

शहरी विकास पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि मुंबई जैसे शहरों में बेहतर योजना, इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी से बड़े पैमाने पर आर्थिक मूल्य सृजित किया जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण और स्थिरता का संतुलन बनाए रखना जरूरी है, खासकर घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यापक दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उन्होंने राष्ट्र निर्माण में सभी के सहयोग के महत्व को दोहराया।

“अगर हम आत्मनिर्भरता, उच्च गुणवत्ता और मजबूत ‘ब्रांड इंडिया’ पर ध्यान केंद्रित करें, तो दुनिया की कोई भी ताकत भारत को वैश्विक नेतृत्व से नहीं रोक सकती। गुणवत्ता केवल उत्पादों में ही नहीं, बल्कि सेवाओं और हमारे दैनिक व्यवहार में भी दिखनी चाहिए। विश्वास और ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना के साथ हम 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं,” ऐसा पीयूष गोयल ने कहा।

कार्यक्रम के अंत में उन्होंने उद्योग जगत से उत्कृष्टता, नवाचार और सहयोग की संस्कृति अपनाने का आह्वान किया, ताकि मुंबई और भारत को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादन और सेवाओं के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सके।

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