क्षमा से बड़ा कोई धर्म नहीं प्रसाद सागर जी महाराज

मुंगावली : मुनिश्री प्रसाद सागर जी महाराज ने उद्बोधन देते कहा सर्वथा प्रदूषण फैला है प्रदूषण को साफ करने के लिये पर्युषन पर आ गया है जैसे हम अपने घरो को तैयार करतेहै वैसे ही दसलक्षण पर्व पर हमे अंदर की तैयारी करना है इसलिए इन दस दिनो मे हमे अंदर से धर्म की तैयारी करना है क्षमा मार्दव आर्जव सत्य शोच संयम तप त्याग आकिंचन और ब्रह्मचर्य ये दसो धर्म एक ही है।

मुनि श्री ने कहा जैसे पंखुड़ी होती है उसी तरह हमे इन दस दिनो का पूरा लाभ लेना है वह व्यक्ति महान नहीं है जो दूसरों को मारकर क्षमा मांगता है महान व्यक्ति वह है जो दूसरों के गलती करने पर भी क्षमा कर देता है हमारे अंदर क्षमा का भाव होना चाहिये भारत की परंपरा रही है पहले बड़े खाना खाते है लेकिन एक दिन पति लेट हो जाता है तो उसकी पत्नी उसको सुनाने लग जाती है जिस वजह से वह व्यक्ति क्रोध न करके बात को घूमा देता है वह क्रोध शांत हो जाता है इसलिए जीवन मे हमेशा सकारात्मक सोच रखनी चाहिये उसके लाभ बहुत है जिस तरह लापरवाही करने से रोग बढ़ जाते है उसी तरह बात बढाने से बात बढ़ जातीहै।

उन्होनेकहा 1730 मे जोधपुर के राजा ने पेड़ काटने की योजना बनाई गयी और एक गाव के लोगो ने उन पेड़ो को काटने से रोका गया मगर राजा के आदेश को पूरा करने के लिये उन पेड़ो को काटना ही था मगर वह नहीं तो पूरे गाव के लोग उन पेड़ो से लिपट गये और उन सभी पेड़ो को काट दिया गया

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