खरगे और राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर मौजूदा प्रक्रिया पर जताई गंभीर आपत्ति, ‘ओपन-एंडेड’ सवालों से सही जातिगत आंकड़े सामने नहीं आने का दावा

नई दिल्ली, 25 अगस्त 2026: कांग्रेस ने केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे बदलने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि जातियों की प्रमाणित सूची के आधार पर नई प्रश्नावली तैयार कर देशभर में जातिगत जनगणना कराई जानी चाहिए। कांग्रेस ने इसके लिए राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और आम जनता से व्यापक विचार-विमर्श करने की भी मांग की है।

कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त पत्र भेजकर जातिगत जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। कांग्रेस का कहना है कि ‘ओपन-एंडेड’ सवालों के माध्यम से जातियों की वास्तविक संख्या दर्ज करना मुश्किल होगा और इसका सबसे ज्यादा नुकसान ओबीसी, अति पिछड़े तथा वंचित समुदायों को उठाना पड़ सकता है।

तेलंगाना और बिहार की तर्ज पर हो जाति जनगणना

नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी के संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि देश में जातिगत जनगणना की प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक और सटीक बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना और बिहार में अपनाई गई पद्धति की तर्ज पर गणनाकारों को पहले से तैयार और प्रमाणित जातियों की सूची उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

जयराम रमेश के साथ कांग्रेस के ओबीसी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जयहिंद भी मौजूद थे।

उन्होंने बताया कि खरगे और राहुल गांधी ने 20 अगस्त को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मौजूदा प्रश्नावली को रद्द करने और प्रमाणित जातियों की सूची के आधार पर नई प्रश्नावली तैयार करने की मांग की है।

कांग्रेस के अनुसार, भारत में एक ही जाति अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में अलग-अलग नामों, उपजातियों तथा भाषाओं के नाम से जानी जाती है। ऐसे में यदि गणनाकारों को पहले से प्रमाणित जातियों की सूची उपलब्ध नहीं होगी, तो एक ही जाति के अलग-अलग नाम दर्ज होने की संभावना रहेगी।

‘ओपन-एंडेड’ सवालों से आंकड़े बिखरने का दावा

कांग्रेस का कहना है कि अलग-अलग नामों और उपजातियों में एक ही समुदाय की प्रविष्टियां दर्ज होने से जातिगत आंकड़ों में विसंगति पैदा हो सकती है। पार्टी के मुताबिक, इससे किसी समुदाय की वास्तविक आबादी का आकलन प्रभावित होगा और उसके सामाजिक एवं आर्थिक पिछड़ेपन से संबंधित योजनाओं के लिए भी सटीक आधार उपलब्ध नहीं हो पाएगा।

जयराम रमेश ने दावा किया कि मौजूदा प्रश्नावली में ‘पिछड़ा वर्ग’ शब्द तक शामिल नहीं है। कांग्रेस का कहना है कि ऐसी स्थिति में देश में ओबीसी आबादी का वास्तविक आंकड़ा सामने आना मुश्किल होगा।

कांग्रेस का सरकार पर ‘यूटर्न’ का आरोप

जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री को जातिगत जनगणना के संबंध में कांग्रेस की ओर से यह तीसरा पत्र है। उनके मुताबिक, मल्लिकार्जुन खरगे ने इससे पहले 16 अप्रैल 2023 को पहला पत्र और 5 मई 2025 को रचनात्मक सुझावों के साथ दूसरा पत्र प्रधानमंत्री को लिखा था। कांग्रेस का दावा है कि दोनों पत्रों पर केंद्र सरकार की ओर से अब तक जवाब नहीं मिला है।

उन्होंने आरोप लगाया कि 2023 और 2024 के चुनावों के दौरान कांग्रेस की जातिगत जनगणना की मांग का विरोध किया गया था, लेकिन बाद में केंद्र सरकार ने वर्ष 2027 में जातिगत जनगणना कराने की घोषणा की। अब कांग्रेस ने प्रक्रिया के प्रारूप पर भी सवाल उठाए हैं।

14 अगस्त की अधिसूचना पर सवाल

जयराम रमेश ने कहा कि 14 अगस्त को जारी अधिसूचना में 40 सवाल शामिल हैं और प्रश्नावली के दसवें सवाल से ही यह स्पष्ट हो जाता है कि सरकार जातिगत जनगणना को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा प्रारूप के जरिए प्रक्रिया को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने 21 सितंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से दायर हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने स्वयं माना था कि जातिगत जनगणना के लिए पहले से जातियों की सूची तैयार होना आवश्यक है।

करीब 4,200 जातियों का दिया हवाला

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि देश में करीब 4,200 जातियां हैं और केंद्र तथा राज्य सरकारों के पास इनकी सूचियां पहले से उपलब्ध हैं। इसलिए प्रमाणित जातियों की सूची तैयार करना या उसे गणनाकारों को उपलब्ध कराना असंभव बताना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि आरक्षण व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार जातिगत आंकड़े हैं। ऐसे में जातिगत जनगणना भी सही और वैज्ञानिक तरीके से कराना आवश्यक है।

नई प्रश्नावली के लिए व्यापक परामर्श की मांग

कांग्रेस ने मांग की है कि मौजूदा प्रश्नावली को रद्द कर राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, विशेषज्ञों और जनता से व्यापक परामर्श किया जाए। इसके बाद ऐसी नई प्रश्नावली तैयार की जाए, जिससे प्रत्येक जाति और समुदाय की वास्तविक संख्या सामने आ सके।

पार्टी का कहना है कि सटीक जातिगत आंकड़े सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों, आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

फरवरी 2027 से देशभर में शुरू होने का दावा

जयराम रमेश ने कहा कि जातिगत जनगणना की प्रक्रिया फिलहाल जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ क्षेत्रों में शुरू हो चुकी है तथा फरवरी 2027 से इसे पूरे देश में शुरू किया जाना है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के पास अभी भी प्रश्नावली और प्रक्रिया में जरूरी सुधार करने का पर्याप्त समय है।

कांग्रेस ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि जातिगत जनगणना को केवल औपचारिक प्रक्रिया न बनाकर वैज्ञानिक, पारदर्शी और विश्वसनीय तरीके से कराया जाए, ताकि देश के विभिन्न सामाजिक समूहों की वास्तविक जनसांख्यिकीय स्थिति सामने आ सके।

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