नई दिल्ली, 27 जुलाई 2026: केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, संगठित नकल और अन्य अनियमितताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाना है।
संशोधन विधेयक में तेजी से जांच, विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के माध्यम से शीघ्र सुनवाई, विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति, अपीलों के समयबद्ध निपटारे और कड़े दंड का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में सामने आए प्रश्नपत्र लीक और संगठित परीक्षा संबंधी अनियमितताओं को देखते हुए मौजूदा कानूनी व्यवस्था को और मजबूत करना आवश्यक है।
पेपर लीक और अनुचित साधनों पर बढ़ेगी सजा
विधेयक में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले दोषियों के लिए न्यूनतम सजा को मौजूदा तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष करने का प्रस्ताव है। अधिकतम सजा पांच वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष की जा सकती है। इसके साथ ही अधिकतम जुर्माने को ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख करने का प्रस्ताव रखा गया है।
परीक्षा में अनियमितताओं में शामिल पाए जाने वाले सेवा प्रदाताओं के लिए अधिकतम जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने और सार्वजनिक परीक्षा आयोजित करने से प्रतिबंध की अवधि चार वर्ष से बढ़ाकर आठ वर्ष करने का प्रस्ताव है।
सेवा प्रदाताओं के प्रबंधकीय अधिकारियों के लिए भी पांच से 10 वर्ष तक के कारावास और अधिकतम ₹5 करोड़ के जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।

संगठित परीक्षा अपराधों पर और कड़ा शिकंजा
संगठित परीक्षा संबंधी अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए न्यूनतम कारावास की अवधि को पांच वर्ष से बढ़ाकर सात वर्ष करने का प्रस्ताव है। अधिकतम सजा 10 वर्ष तक और अधिकतम जुर्माना ₹10 करोड़ तक करने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
विधेयक के तहत केंद्र सरकार को अधिनियम के अंतर्गत आने वाले अपराधों की जांच के लिए विशेष रूप से गठित स्पेशल टास्क फोर्स को जांच सौंपने का अधिकार देने का भी प्रस्ताव है।
दो महीने में जांच, तीन महीने में ट्रायल का प्रस्ताव
प्रस्तावित नए धारा 12A के तहत अपराधों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके अलावा सेशन कोर्ट को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के रूप में नामित कर रोजाना सुनवाई के माध्यम से मुकदमे को तेजी से पूरा करने की व्यवस्था की जाएगी।
चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रत्येक विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने का भी प्रस्ताव है।
हाई कोर्ट में 30 दिन के भीतर अपील
प्रस्तावित धारा 12B के तहत विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के किसी फैसले, आदेश या सजा के खिलाफ 30 दिनों के भीतर हाई कोर्ट में अपील की जा सकेगी। ऐसी अपीलों का भी, जहां तक संभव हो, तीन महीने के भीतर निपटारा किए जाने का प्रस्ताव है।
2024 के कानून को और मजबूत करने की तैयारी
सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 को 12 फरवरी 2024 को अधिनियमित किया गया था और यह 21 जून 2024 से लागू हुआ। यह कानून सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
यह कानून संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनेल सेलेक्शन (IBPS), राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) सहित केंद्र सरकार के मंत्रालयों एवं विभागों तथा उनके अधीनस्थ कार्यालयों द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं पर लागू होता है। केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य प्राधिकरणों की परीक्षाएं भी इसके दायरे में आ सकती हैं।
सरकार के अनुसार प्रस्तावित संशोधन से पेपर लीक, नकल, प्रतिरूपण और संगठित परीक्षा अपराधों पर रोक लगाने के लिए कानूनी व्यवस्था मजबूत होगी। साथ ही तेज जांच और समयबद्ध न्याय के जरिए ईमानदार एवं मेधावी अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा और देश की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली में लोगों का विश्वास मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।

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