खरगे की रैली के बाद मंच ‘शुद्धिकरण’ विवाद पर राहुल गांधी का हमला, बोले- तुरंत दर्ज हो FIR

नई दिल्ली, 29 अगस्त 2026: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने इसे छुआछूत बताते हुए आरोप लगाया कि यह SC-ST एक्ट के तहत दंडनीय अपराध है। उन्होंने मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में पत्रकार वार्ता के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि घटना के करीब 20 दिन बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यह केवल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के अपमान का मामला नहीं है, बल्कि देश के हर दलित के सम्मान से जुड़ा सवाल है।

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‘शुद्धिकरण’ छुआछूत का दूसरा नाम: राहुल गांधी

राहुल गांधी ने कहा कि 8 अगस्त को हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खरगे की रैली हुई थी। उनके मुताबिक, रैली के बाद 10 अगस्त को भाषण मंच का ‘शुद्धिकरण’ किया गया। 13 अगस्त को खरगे ने संसद में इस घटना का मुद्दा उठाया था।

राहुल गांधी ने कहा कि शुद्धिकरण का संदेश यही है कि दलित को छूना नहीं चाहिए और दलित ‘गंदे’ हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की सोच संविधान की मूल भावना के खिलाफ है और कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि मामले में SC-ST एक्ट के तहत कार्रवाई के आदेश दिए जाएं।

‘भाजपा-आरएसएस की दलित विरोधी मानसिकता उजागर’

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद को हर जाति का बताते हैं, वहीं भाजपा के उत्तराखंड अध्यक्ष महेंद्र भट्ट द्वारा कथित तौर पर मंच के शुद्धिकरण को सही ठहराया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस घटना से भाजपा-आरएसएस की विचारधारा और मानसिकता सामने आती है। राहुल गांधी के मुताबिक, यदि देश के एक वरिष्ठ दलित नेता के साथ सार्वजनिक रूप से इस तरह का व्यवहार किया जा सकता है तो आम दलितों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस तरह के व्यवहार को स्वीकार नहीं करेगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष करेगी।

‘20 दिन बाद भी FIR नहीं’

राहुल गांधी ने कहा कि घटना के 20 दिन बीत जाने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं होना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की चुप्पी भी इस पूरे मामले में उनकी वैचारिक सोच को दर्शाती है।

हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बसपा प्रमुख मायावती की कथित चुप्पी को लेकर सवाल पूछे जाने पर राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें किसी के बयान में रुचि नहीं है। उनकी मांग केवल इतनी है कि कानून के अनुसार कार्रवाई हो और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।

‘दलित जितना सफल होता है, उतना ही हमला होता है’

राहुल गांधी ने कहा कि देश में किसी दलित व्यक्ति के सफल होने पर उसके खिलाफ उतनी ही ताकत से हमला किया जाता है। उन्होंने दावा किया कि ऐसी घटनाएं देश में रोजाना करोड़ों लोगों के साथ होती हैं।

उन्होंने राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी से जुड़े कथित मंदिर ‘शुद्धिकरण’ के मामलों का भी उल्लेख किया। राहुल गांधी ने कहा कि इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि सामाजिक भेदभाव की समस्या अभी भी मौजूद है।

संविधान बनाम मनुस्मृति की विचारधारा की लड़ाई: राहुल

पत्रकार वार्ता के दौरान राहुल गांधी ने मंच पर संविधान और मनुस्मृति की प्रतियां दिखाते हुए कहा कि देश में दो विचारधाराओं के बीच लड़ाई चल रही है। उनके अनुसार, एक तरफ संविधान है और दूसरी तरफ भाजपा-आरएसएस की विचारधारा।

उन्होंने कहा कि दलितों के खिलाफ भेदभाव और अत्याचार का इतिहास बहुत पुराना है, लेकिन संविधान लागू होने के बाद भी ऐसी घटनाओं का जारी रहना गंभीर चिंता का विषय है।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश के कुछ स्कूलों में दलित बच्चों से कथित तौर पर टॉयलेट साफ करवाया जाता है और झाड़ू लगवाई जाती है। उन्होंने कुओं से पानी लेने, चाय की दुकानों पर भेदभाव और दलितों के विवाह समारोहों में घोड़े पर चढ़ने जैसे मामलों में कथित सामाजिक भेदभाव का भी उल्लेख किया।

राजेंद्र पाल गौतम ने भी उठाए सवाल

इससे पहले कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने भी दलितों और आदिवासियों के साथ कथित भेदभाव और अत्याचार का मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा कि घड़ा छूने, मूंछ रखने या मूर्ति छूने जैसी बातों को लेकर भी दलितों के साथ अत्याचार की घटनाएं सामने आती रही हैं।

कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि हल्द्वानी की घटना में तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए और दोषियों के खिलाफ मामला दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए।

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