नई दिल्ली, 5 अगस्त। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को विभिन्न राज्यों से आए छात्र प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और शिक्षा व्यवस्था, छात्र आंदोलनों तथा कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज उठाना अपराध नहीं है और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग पूरी तरह जायज़ है।
पत्रकारों से बातचीत में राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों ने उन्हें बताया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान उनके साथ मारपीट की गई, धमकाया गया और कथित रूप से लाठियां चलाई गईं। उन्होंने कहा कि संविधान, शिक्षा व्यवस्था और देश के भविष्य की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले युवाओं पर उन्हें गर्व है।
राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा पत्र लीक रोकने और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने की मांग को दबाने के बजाय सरकार को इन मुद्दों पर गंभीरता से काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों को माफी मांगने के लिए मजबूर करना उचित नहीं है।
प्रेस वार्ता में मौजूद कुछ छात्र-छात्राओं ने भी अपने अनुभव साझा किए। मुंबई की छात्रा रिया अहीर ने सोशल मीडिया पर कथित उत्पीड़न और धमकियों का आरोप लगाया, जबकि झारखंड की नूतन टोप्पो ने प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से पैलेट गन से घायल होने का दावा किया। उत्तर प्रदेश की फराह नाज़ और दिल्ली की मुस्कान शर्मा ने भी पुलिस कार्रवाई और कथित दुर्व्यवहार के आरोप लगाए।
राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यदि उन्हें कार्रवाई की जानकारी नहीं थी तो यह उनकी प्रशासनिक विफलता है और यदि जानकारी थी तो वे सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। उन्होंने गृह मंत्री से इस मुद्दे पर संसद और देश के सामने जवाब देने की मांग की।
उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।


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