Defence Production: 1.8 लाख करोड़ के रिकॉर्ड उत्पादन में DPSU का बड़ा योगदान, राजनाथ सिंह ने दिए नए लक्ष्य

नई दिल्ली, 1 सितंबर 2026: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली में 16 रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) के वार्षिक कामकाज की समीक्षा की। बैठक में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार तथा सभी डीपीएसयू के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशकों (सीएमडी) ने हिस्सा लिया।

समीक्षा बैठक के दौरान डीपीएसयू ने अपने-अपने संस्थानों के कामकाज, प्रमुख उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। रक्षा मंत्री ने स्वदेशी रक्षा उत्पादन और विनिर्माण क्षमता बढ़ाने, अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों के विकास, रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और महत्वपूर्ण परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की।

करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीपीएसयू के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि सभी 16 रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन हासिल किया। इसमें डीपीएसयू का योगदान लगभग 1.29 लाख करोड़ रुपये रहा।

रक्षा मंत्री ने इस उपलब्धि को आत्मनिर्भर रक्षा औद्योगिक आधार तैयार करने की दिशा में भारत की महत्वपूर्ण प्रगति बताया। उन्होंने डीपीएसयू के निरंतर समर्पण और उत्कृष्ट कार्य के लिए अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई दी।

‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ पर जोर

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत को ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए डीपीएसयू को वैश्विक स्तर की बड़ी और प्रतिस्पर्धी कंपनियों में बदलना होगा।

उन्होंने डीपीएसयू से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को और मजबूत करने तथा वैश्विक बाजार में भारतीय रक्षा उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के लिए नई तकनीक, नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर ध्यान देने का आग्रह किया।

समय पर डिलीवरी और आयात निर्भरता कम करने की अपील

रक्षा मंत्री ने डीपीएसयू को समय पर रक्षा उपकरणों और प्रणालियों की डिलीवरी सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने आयात पर निर्भरता कम करने, अनुसंधान एवं विकास को तकनीकी नेतृत्व में बदलने तथा रक्षा निर्यात को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाने के साथ उत्पादकता में सुधार, स्टार्टअप और एमएसएमई को अधिक सहयोग देने तथा वैश्विक मानकों के अनुरूप गुणवत्ता सुनिश्चित करने की अपील की।

राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ी है डीपीएसयू की प्रगति

राजनाथ सिंह ने कहा कि डीपीएसयू की प्रगति केवल आर्थिक या औद्योगिक आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि हाल के वैश्विक संघर्षों ने यह स्पष्ट किया है कि किसी भी देश के लिए भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला, आवश्यकता पड़ने पर उत्पादन क्षमता को तेजी से बढ़ाने की क्षमता, आवश्यक स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता और तेज मरम्मत क्षमता बेहद जरूरी है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की स्थिति में उत्पादन क्षमता को बनाए रखना किसी भी देश की रणनीतिक ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

सात डीपीएसयू ने दिए 3,951 करोड़ रुपये के लाभांश चेक

कार्यक्रम के दौरान सात डीपीएसयू के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार की इक्विटी हिस्सेदारी पर कुल 3,951 करोड़ रुपये के लाभांश के चेक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सौंपे।

लाभांश देने वाले डीपीएसयू में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL), गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE), BEML और मिधानी (MIDHANI) शामिल हैं।

चार पुस्तकों का विमोचन

कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने चार प्रकाशनों का भी विमोचन किया। इनमें ‘आत्मनिर्भर डीपीएसयू—आत्मनिर्भरता की ओर डीपीएसयू की यात्रा’ प्रमुख है। इसमें अगले पांच वर्षों के दौरान स्वदेशीकरण, नए उत्पादों के विकास और नई प्रक्रियाओं को अपनाने से संबंधित योजनाओं को रेखांकित किया गया है।

दूसरा प्रकाशन ‘दिशा’ है, जिसके माध्यम से रक्षा उद्योग और विद्यार्थियों के बीच संवाद को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा। इसका उद्देश्य युवाओं को रक्षा प्रौद्योगिकी और आधुनिक विनिर्माण प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराना है।

इसके अलावा ‘एचएएल का आधुनिकीकरण रोडमैप’ और ‘एचएएल का स्वदेशीकरण रोडमैप’ भी जारी किए गए। इन दोनों प्रकाशनों में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को भविष्य के लिए तैयार एयरोस्पेस कंपनी बनाने तथा एयरोस्पेस एवं रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की योजनाओं को रेखांकित किया गया है।

स्वदेशीकरण और नवाचार को मिलेगी गति

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन पहलों में आत्मनिर्भरता, स्वदेशीकरण, नवाचार और भविष्य के लिए तैयार रक्षा क्षमताओं के विकास पर विशेष जोर दिया गया है।

रक्षा मंत्री ने डीपीएसयू से रक्षा विनिर्माण में नई तकनीकों को अपनाने, निजी क्षेत्र, स्टार्टअप और एमएसएमई के साथ सहयोग बढ़ाने तथा भारतीय रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में लगातार काम करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि मजबूत और आत्मनिर्भर रक्षा औद्योगिक आधार न केवल भारत की आर्थिक एवं औद्योगिक क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि देश की रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूती देगा।

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