नई दिल्ली, 16 अप्रैल। महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर संसद में तीखी बहस के बीच Priyanka Gandhi Vadra ने केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने मांग की कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों के भीतर ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए और इसमें एससी, एसटी और ओबीसी महिलाओं के लिए भी अलग आरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि अगर सरकार वास्तव में महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना चाहती है, तो यह कदम तुरंत उठाया जा सकता है और महिला आरक्षण आज ही लागू हो सकता है।
महिला आरक्षण विधेयक में ‘राजनीति की बू’ : प्रियंका
संविधान संशोधन और परिसीमन विधेयक पर चर्चा के दौरान Indian National Congress की नेता प्रियंका गांधी ने कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण के समर्थन में पूरी मजबूती से खड़ी है, लेकिन मौजूदा प्रस्ताव में राजनीतिक मंशा की झलक दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि अगर Narendra Modi ईमानदारी से यह ऐतिहासिक कदम उठाते, तो पूरा संसद एकजुट होकर इसे पारित करता।
‘2011 की जनगणना के आधार पर OBC का हक छीना जा रहा’
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार 2011 की जनगणना को परिसीमन का आधार बनाकर आगे बढ़ना चाहती है, जबकि इसमें ओबीसी वर्ग के आंकड़े शामिल नहीं हैं।
उनके मुताबिक इससे ओबीसी वर्ग के प्रतिनिधित्व को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि जब तक जातिगत जनगणना नहीं होती, तब तक सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल सकता।
संसद विस्तार पर भी उठाए सवाल
प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक में संसद का लगभग 50 प्रतिशत विस्तार करने की बात कही गई है, लेकिन इसके नियम और प्रक्रिया स्पष्ट नहीं हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि 1971 में तय किए गए सिद्धांत के अनुसार राज्यों की भागीदारी को संतुलित रखा गया था, लेकिन नए विधेयक से इस संतुलन पर असर पड़ सकता है।
‘महिला अधिकारों की नींव कांग्रेस ने रखी’
प्रियंका गांधी ने कहा कि महिला अधिकारों के लिए कांग्रेस का ऐतिहासिक योगदान रहा है।
उन्होंने बताया कि महिलाओं के समान अधिकार की अवधारणा 1928 की मोतीलाल नेहरू रिपोर्ट और 1931 के कराची अधिवेशन से मजबूत हुई।
इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री Rajiv Gandhi ने पंचायत और नगर पालिकाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव पेश किया था, जिसे बाद में कांग्रेस सरकार ने लागू किया।
विपक्ष को ‘धर्म संकट’ में डालने का आरोप
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस विधेयक का मसौदा बिना सर्वदलीय बैठक के आखिरी समय में साझा किया, जिससे विपक्ष को असमंजस की स्थिति में डाल दिया गया।
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण जैसे ऐतिहासिक मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

